मध्य प्रदेश में 11 करोड़ का कंप्यूटर घोटाला: पुराने उपकरणों को नया बताकर खपाने का आरोप, चार पर FIR
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच में सामने आया कि टेंडर में शामिल चार कंपनियां एक ही व्यक्ति से जुड़ी थीं। इन कंपनियों ने आपस में प्रतिस्पर्धी बनकर टेंडर में हिस्सा लिया।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

सरकारी खरीद में बड़ा फर्जीवाड़ा
मध्य प्रदेश में सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) के माध्यम से की गई करीब 10.99 करोड़ रुपये की कंप्यूटर खरीद में बड़ा घोटाला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच में यह खुलासा हुआ है कि इस पूरी प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर धांधली की गई। जांच के बाद EOW ने चार व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि टेंडर प्रक्रिया में शामिल चार अलग-अलग कंपनियां वास्तव में एक ही व्यक्ति द्वारा नियंत्रित की जा रही थीं। इन कंपनियों ने टेंडर में एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी के रूप में भाग लिया, ताकि टेंडर किसी भी स्थिति में उनके ही समूह को मिले। इस मिलीभगत के लिए कंपनियों ने एक ही मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, पते और समान जीएसटी अकाउंट का उपयोग किया था।
पुराने कंप्यूटरों को नया बताकर सप्लाई
आरोप है कि टेंडर हासिल करने के बाद इन कंपनियों ने सरकारी विभागों को पुराने कंप्यूटर नए बताकर सप्लाई कर दिए। EOW के अनुसार, एक मामले में 22 जुलाई 2024 को लगाए गए कंप्यूटरों को 23 सितंबर 2024 के टेंडर में नए उपकरणों के रूप में दर्शाया गया। इतना ही नहीं, कंप्यूटरों में निर्धारित तकनीकी मानकों (स्पेसिफिकेशन) का भी पालन नहीं किया गया और स्थानीय स्तर पर खरीदी गई रैम (RAM) और एसएसडी (SSD) का इस्तेमाल किया गया।
जांच में यह भी पाया गया कि टेंडर में पात्रता हासिल करने के लिए एक नामी मल्टीनेशनल कंप्यूटर निर्माता कंपनी के नाम से फर्जी ऑथराइजेशन लेटर जमा किए गए थे। इन दस्तावेजों के जरिए सरकारी तंत्र को गुमराह करने का प्रयास किया गया।
कीमतों में भारी हेरफेर और वित्तीय अनियमितता
कंप्यूटरों के अलावा यूपीएस (UPS) की खरीद में भी भारी वित्तीय अनियमितता सामने आई है। जांच में पता चला कि जिस यूपीएस की बाजार कीमत करीब 3,754 रुपये थी, उसे सरकारी खजाने से 11,247 रुपये की दर से खरीदा गया। जबकि उस यूपीएस की प्रिंटेड कीमत मात्र 6,086 रुपये थी। एक निर्माता ने तो EOW को यह भी बताया कि टेंडर में जिस मॉडल के यूपीएस का उल्लेख किया गया था, उसकी सप्लाई ही नहीं की गई।
EOW के डीजी उपेंद्र जैन ने बताया कि इन कंपनियों ने टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह से प्रभावित किया। जांच में मिले सबूतों के आधार पर चार लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके साथ ही, इन कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
आगे की कार्रवाई
फिलहाल EOW इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घोटाले में और कौन-कौन से अधिकारी या कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। इस खरीद प्रक्रिया में शामिल अन्य दस्तावेजों और भुगतान की फाइलों को भी खंगाला जा रहा है। मामले में शामिल कंपनियों की संपत्तियों और उनके वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है ताकि सरकारी धन की रिकवरी की जा सके।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!