लखनऊ से लापता किशोर 10 महीने बाद हरियाणा के ढाबे से मिला, वेतन विवाद के बाद घर से भागा था
Lucknow missing teenager found working in Haryana dhaba after salary dispute. किशोर डिलीवरी बॉय का काम करता था और कंपनी के मैनेजर से वेतन को लेकर विवाद होने के बाद बिना किसी को बताए घर छोड़कर चला गया था। घर छोड़ने के बाद हरियाणा के यमुनानगर पहुंच गया था।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

10 महीने की तलाश के बाद मिली सफलता
राजधानी लखनऊ के तालकटोरा थाना क्षेत्र से करीब 10 महीने पहले रहस्यमय तरीके से लापता हुए एक किशोर को पुलिस ने सकुशल बरामद कर लिया है। एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद किशोर को हरियाणा के यमुनानगर से खोज निकाला। यह किशोर अपने घर से बिना बताए चला गया था और तब से परिजन उसकी तलाश में जुटे थे।
पुलिस जांच में सामने आया है कि किशोर लखनऊ में एक डिलीवरी कंपनी में काम करता था। इसी दौरान कंपनी के मैनेजर के साथ उसकी वेतन को लेकर कहासुनी और विवाद हो गया था। इस घटना से आहत होकर किशोर ने घर छोड़ दिया और शहर से बाहर निकल गया। काफी समय तक उसके बारे में कोई सुराग न मिलने पर परिजनों ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पहचान छिपाकर ढाबे पर कर रहा था काम
घर छोड़ने के बाद किशोर भटकते हुए हरियाणा के यमुनानगर पहुंच गया था। वहां उसने अपनी पहचान छिपाकर एक स्थानीय भोजनालय 'बरकत डीलक्स वैष्णो ढाबा' में काम करना शुरू कर दिया। वह अपनी पुरानी जिंदगी और विवादों से दूर वहां गुमनामी की जिंदगी जी रहा था। इस बीच, लखनऊ पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एएचटीयू को सौंप दी थी।
एडीसीपी क्राइम किरण यादव ने बताया कि मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, मुखबिर तंत्र और स्थानीय इंटेलिजेंस का सहारा लिया। करीब 10 महीने तक चली लंबी जांच के बाद पुलिस को यमुनानगर के उस ढाबे की सटीक लोकेशन मिली, जहां किशोर काम कर रहा था। पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए वहां दबिश दी और किशोर को सुरक्षित बरामद कर लिया।
ऑपरेशन मुस्कान के तहत परिजनों को सौंपा
हरियाणा से सकुशल बरामद करने के बाद पुलिस टीम किशोर को लखनऊ लेकर आई। यहां कानूनी प्रक्रिया के तहत उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया। सभी वैधानिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के आदेश पर 21 जुलाई को किशोर को उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया। 10 महीने बाद अपने बेटे को वापस पाकर परिजनों ने राहत की सांस ली है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई 'ऑपरेशन मुस्कान' के अंतर्गत की गई है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य देश भर में लापता हुए बच्चों को ढूंढना और उन्हें उनके परिवारों से मिलाना है। पुलिस ने इस मामले में तकनीकी सर्विलांस का बेहतरीन इस्तेमाल किया, जिससे एक लंबे समय से लापता किशोर को खोजने में सफलता मिली।
जांच में सामने आए अहम तथ्य
इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मामूली विवाद या मानसिक तनाव में किशोर अक्सर घर छोड़ने जैसा बड़ा कदम उठा लेते हैं। पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों के साथ संवाद बनाए रखें और किसी भी प्रकार के तनाव की स्थिति में उनका मार्गदर्शन करें। फिलहाल, किशोर अब अपने परिवार के साथ सुरक्षित है और पुलिस ने इस मामले की फाइल बंद कर दी है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
