लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे पर सवाल: 18 दिन में 84 जगहों पर धंसी सड़क, निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर प्रश्न
Uttar Pradesh (UP) Lucknow Kanpur Expressway Road Collapse Condition Investigation Ground Report; 26 जुलाई को खबर आई कि उन्नाव जिले के बेगमखेड़ा में सड़क धंस गई है। 30 जुलाई को दूसरी जगह पर सड़क धंस गई। 31 जुलाई को तीसरी जगह।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

महज 18 दिनों में 84 बार मरम्मत की नौबत
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के कुछ ही दिनों के भीतर इसकी निर्माण गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे पर महज 18 दिनों के भीतर 84 अलग-अलग स्थानों पर सड़क धंसने की घटनाएं सामने आई हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि एनएचएआई (NHAI) को निर्माण कार्य करने वाली कंपनी को 'नॉन-परफॉर्मर' घोषित करना पड़ा है। इस मामले की जांच के लिए अब आईआईटी खड़गपुर की टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, कानपुर जाने वाली लेन पर 39 और लखनऊ जाने वाली लेन पर 45 स्थानों पर पैचवर्क किया जा चुका है। कई जगहों पर सड़क धंसने के बाद डामर और गिट्टी डालकर मरम्मत की गई, लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर वहां फिर से दरारें उभर आईं। उन्नाव के पास इजरायल खेड़ा और अन्य क्षेत्रों में सड़क का बड़ा हिस्सा धंसने से यातायात प्रभावित हुआ है और मरम्मत कार्य के दौरान कई बार डायवर्जन भी करना पड़ा है।
निर्माण में अनियमितता और तकनीकी खामियां
विशेषज्ञों और स्थानीय इंजीनियरों का मानना है कि सड़क के फाउंडेशन में गंभीर अनियमितताएं बरती गई हैं। आमतौर पर मिट्टी की परतों को रोलर से दबाकर समतल किया जाता है, लेकिन यहां मिट्टी के बड़े ढेर एक साथ डाल दिए गए, जिससे आधार कमजोर हो गया। सड़क पर चलने वाले वाहन चालकों को कई स्थानों पर असामान्य उछाल महसूस होता है, जो सड़क के धंसने और सतह के ऊबड़-खाबड़ होने का संकेत देता है। कुछ स्थानों पर तो सड़क के बीच में एक फीट तक के गड्ढे बन गए हैं।
निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों ने भी नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सड़क की मजबूती के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री मानक के अनुरूप नहीं है। सड़क के किनारे बने 'शोल्डर' भी बारिश के पानी के कारण धंस गए हैं, जिससे मुख्य मार्ग को और अधिक नुकसान पहुंच रहा है। 100 किलोमीटर प्रति घंटे की निर्धारित गति सीमा पर भी वाहन चलाना जोखिम भरा हो गया है, क्योंकि सड़क की सतह पर कंपन और उछाल महसूस होता है।
महंगा प्रोजेक्ट और विवादों का साया
यह एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के सबसे महंगे प्रोजेक्ट्स में से एक है, जिसकी लागत करीब 4700 करोड़ रुपये है। प्रति किलोमीटर निर्माण लागत लगभग 75 करोड़ रुपये आई है। इस प्रोजेक्ट को पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड द्वारा तैयार किया गया है, जिसके मालिक भाजपा के राज्यसभा सांसद के भाई बताए जाते हैं। कंपनी पहले भी सीबीआई जांच और टेंडर विवादों के कारण चर्चा में रही है, जिसके चलते उसे कुछ समय के लिए प्रतिबंधित भी किया गया था।
इस एक्सप्रेस-वे पर टोल की दरें भी काफी अधिक हैं, लेकिन सुविधाएं और सड़क की स्थिति दावों के विपरीत है। एक तरफ का टोल 275 रुपये और दोनों तरफ का 415 रुपये वसूला जा रहा है। आम जनता और वाहन चालकों का कहना है कि भारी टोल चुकाने के बावजूद उन्हें ऐसी सड़क मिल रही है जो उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद जर्जर हो गई है।
आगे की राह और जांच की स्थिति
एनएचएआई ने निर्माण कंपनी के तीन अधिकारियों को हटा दिया है और अगले दो वर्षों के लिए कंपनी पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब आईआईटी खड़गपुर की टीम यह पता लगाएगी कि निर्माण में कहां और किस स्तर पर लापरवाही बरती गई। जानकारों का कहना है कि यदि सड़क की नींव में दोष है, तो केवल पैचवर्क से काम नहीं चलेगा; इसके लिए सड़क के बड़े हिस्से को उखाड़कर दोबारा निर्माण करना पड़ सकता है।
फिलहाल, मरम्मत का काम लगातार जारी है, लेकिन बारिश और भारी वाहनों के दबाव के कारण सड़क की स्थिति और बिगड़ने का अंदेशा बना हुआ है। प्रशासन और एनएचएआई के अधिकारी इस मामले पर आधिकारिक रूप से कुछ भी बोलने से बच रहे हैं, जबकि जनता का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
