लखनऊ विकास प्राधिकरण में भ्रष्टाचार की जांच तेज: 50 पेशेवर शिकायतकर्ताओं की सूची विजिलेंस को सौंपी
Lucknow LDA corruption probe, vigilance department investigates professional complainants list. प्राधिकरण ने अवैध निर्माण के नाम पर आईजीआरएस और अन्य माध्यमों से लगातार शिकायत करने वाले टॉप-50 पेशेवर शिकायतकर्ताओं की सूची उनके नाम और मोबाइल नंबर सहित विजिलेंस को सौंप दी है। इसके साथ ही जांच में सहयोग के लिए एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने सचिव विवेक श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

एलडीए में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख
लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) में हाल ही में सामने आए रिश्वतखोरी के मामले के बाद अब जांच का दायरा काफी विस्तृत कर दिया गया है। प्राधिकरण प्रशासन ने अवैध निर्माण की आड़ में लगातार शिकायतें करने वाले टॉप-50 पेशेवर शिकायतकर्ताओं की एक विस्तृत सूची तैयार की है। इस सूची में इन लोगों के नाम और मोबाइल नंबर शामिल हैं, जिसे अब उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) को सौंप दिया गया है। इस कदम का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या इन शिकायतों के पीछे कोई संगठित गिरोह या भ्रष्टाचार का कोई बड़ा जाल तो नहीं छिपा है।
प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इस पूरे मामले की निगरानी के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। सचिव विवेक श्रीवास्तव की अध्यक्षता में बनी यह समिति विजिलेंस के साथ समन्वय स्थापित करेगी। एलडीए का स्पष्ट कहना है कि भ्रष्टाचार या किसी भी प्रकार की अनियमितता में यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने पहले ही एक पंप ऑपरेटर को निलंबित कर दिया है और एक अवर अभियंता के निलंबन की प्रक्रिया शासन स्तर पर चल रही है।
विजिलेंस की जांच और दस्तावेजों का आदान-प्रदान
सतर्कता विभाग ने एलडीए से आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की पत्रावलियां, संबंधित रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की मांग की है। गठित समिति को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह 24 घंटे के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेज जांच एजेंसी को उपलब्ध कराए। विजिलेंस की टीम यह सुनिश्चित करना चाहती है कि शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया में कहीं कोई मिलीभगत तो नहीं थी। इस जांच से उन बिचौलियों की पहचान भी हो सकेगी जो अक्सर प्रवर्तन अनुभाग के आसपास सक्रिय रहते हैं।
प्राधिकरण ने अपने प्रवर्तन अनुभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भविष्य में किसी भी शिकायत पर कार्रवाई करने से पहले उसका गहन सत्यापन किया जाए। अब बिना ठोस सबूत और भौतिक सत्यापन के किसी भी शिकायत को आधार मानकर कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि पेशेवर शिकायतकर्ताओं के जरिए होने वाले उत्पीड़न और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सके।
सीसीटीवी फुटेज से बिचौलियों की पहचान
जांच के क्रम में विजिलेंस ने एलडीए कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज को एक महत्वपूर्ण साक्ष्य माना है। विशेष रूप से घटना वाले दिन सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक की फुटेज मांगी गई है। इसके अतिरिक्त, पिछले एक महीने की रिकॉर्डिंग भी जांच एजेंसी को सौंपी जाएगी। एलडीए प्रशासन का मानना है कि फुटेज के विश्लेषण से उन संदिग्ध व्यक्तियों और बिचौलियों के चेहरों को पहचाना जा सकेगा, जो अक्सर फाइलों को प्रभावित करने या अवैध निर्माण की धमकियां देने के लिए कार्यालय में आते-जाते रहते हैं।
इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य एलडीए की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाना है। प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि पेशेवर शिकायतकर्ताओं की सूची विजिलेंस को सौंपने से उन लोगों पर दबाव बनेगा जो अवैध निर्माण के नाम पर वसूली का धंधा चला रहे थे। आने वाले दिनों में इस जांच के आधार पर कई अन्य लोगों पर भी कानूनी शिकंजा कस सकता है, जिससे प्राधिकरण की छवि को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
