कोटा विकास प्राधिकरण रिश्वत मामला: बाबू और संविदाकर्मी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल
Kota KDA bribery case update corruption chargesheet filed against clerk and contractual staff. कोटा एसीबी ने कोटा विकास प्राधिकरण (KDA) में रिश्वत लेते गिरफ्तार हुए संविदाकर्मी कपिलराज व बाबू जुगल किशोर के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया। जुगल ने संविदाकर्मी कपिल के साथ मिलकर परिवादी पर रिश्वत देने का दबाव बनाया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

कोटा विकास प्राधिकरण में भ्रष्टाचार का मामला
कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) में रिश्वतखोरी के एक गंभीर मामले में कोटा एसीबी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी है। इस मामले में केडीए के एक बाबू और एक संविदाकर्मी को आरोपी बनाया गया है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने एक परिवादी से मकान के नाम हस्तांतरण के काम के बदले भारी रिश्वत की मांग की थी और काम अटकाए रखा था।
एसीबी के अनुसार, परिवादी ने अपनी मां के निधन के बाद अपने भाई-बहनों से मकान की रिलीज डीड प्राप्त की थी। इसके बाद उसने केडीए में नाम हस्तांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। जब वह आवेदन की स्थिति जानने के लिए कार्यालय पहुंचा, तो उसकी मुलाकात कमरा नंबर 212 में बैठे संविदाकर्मी कपिलराज से हुई। कपिलराज ने खुद को केडीए का कर्मचारी बताते हुए काम कराने का भरोसा दिलाया।
रिश्वत के लिए बनाया गया दबाव
आरोप है कि कपिलराज ने विज्ञप्ति जारी करने के नाम पर परिवादी से 20 हजार रुपये की मांग की और रसीद देने का झांसा देकर यह राशि ले ली। इसके बाद, जब परिवादी ने काम पूरा होने के बारे में पूछा, तो उसे बताया गया कि संबंधित अधिकारी का तबादला हो गया है और अब नए अधिकारी जुगल किशोर मीणा के पास फाइल है। कपिलराज ने दावा किया कि यदि 50 हजार रुपये और नहीं दिए गए, तो पहले दिए गए 20 हजार रुपये भी डूब जाएंगे और काम नहीं होगा।
परिवादी को विश्वास में लेने के लिए कपिलराज उसे कार्यालय से बाहर ले गया और काम को आगे बढ़ाने के लिए कुल 70 हजार रुपये की मांग दोहराई। इस लगातार दबाव और भ्रष्टाचार से परेशान होकर परिवादी ने कोटा एसीबी में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद एसीबी ने मामले की पुष्टि की और जाल बिछाया।
एसीबी की ट्रैप कार्रवाई और गिरफ्तारी
एसीबी की टीम ने 5 जून को योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की। जैसे ही परिवादी ने कपिलराज को 15 हजार रुपये की रिश्वत दी, एसीबी ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान इस रिश्वतखोरी में बाबू जुगल किशोर मीणा की संलिप्तता भी स्पष्ट हुई, जिसके बाद उन्हें भी हिरासत में ले लिया गया। एसीबी ने दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
कोटा देहात एसीबी के एडिशनल एसपी गोपाल सिंह कानावत ने बताया कि मामले की गहन जांच के बाद अब कोर्ट में चालान पेश कर दिया गया है। इस कार्रवाई से केडीए कार्यालय में हड़कंप मच गया था। अब कानूनी प्रक्रिया के तहत दोनों आरोपियों पर आगे की सुनवाई होगी।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख
यह मामला सरकारी कार्यालयों में आम नागरिकों को होने वाली परेशानी और भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को दर्शाता है। केडीए जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में फाइलों को अटकाकर रिश्वत मांगने की घटनाएं अक्सर सामने आती रही हैं। एसीबी की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
आगामी दिनों में कोर्ट में इस मामले की सुनवाई शुरू होगी, जहां अभियोजन पक्ष दोनों आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य प्रस्तुत करेगा। परिवादी की शिकायत के बाद हुई इस त्वरित कार्रवाई से स्पष्ट है कि सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए एसीबी लगातार सक्रिय है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
