कानपुर: 171 दुर्लभ कछुओं के साथ तस्कर गिरफ्तार, चीन और हांगकांग तक फैला था तस्करी का जाल
लखनऊ एसटीएफ ने हरबंश मोहाल के पास रेलवे क्रासिंग से एक कछुआ तस्कर को धर दबोचा। तस्कर के पास से प्रतिबंधित प्रजातियों के 171 कछुए बरामद हुए।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

कानपुर में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने भारी मात्रा में प्रतिबंधित कछुओं के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार किया है। हरबंश मोहाल थाना क्षेत्र के अंतर्गत रेलवे क्रॉसिंग के पास से पकड़े गए इस आरोपी के कब्जे से 171 दुर्लभ प्रजाति के कछुए बरामद किए गए हैं। यह बरामदगी वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
गुप्त सूचना पर एसटीएफ ने बिछाया जाल
एसटीएफ के अधिकारियों के अनुसार, उन्हें लंबे समय से प्रतिबंधित कछुओं की तस्करी की सूचनाएं मिल रही थीं। दरोगा फैजुद्दीन सिद्दीकी की टीम ने इस गिरोह की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जाल बिछाया था। शनिवार को जब टीम को पुख्ता जानकारी मिली कि तस्करों का एक बड़ा खेप शहर में आने वाला है, तो वन विभाग के साथ संयुक्त रूप से घेराबंदी की गई। इसी दौरान हरबंश मोहाल रेलवे क्रॉसिंग के पास संदिग्ध अवस्था में घूम रहे एक व्यक्ति को दबोच लिया गया।
पूछताछ में आरोपी की पहचान फतेहगढ़ के कमालगंज थाना क्षेत्र के भटपुरा गांव निवासी जाहिद अली के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान उसके पास से बोरी में भरे हुए 171 'इंडियन रूफर्ड टर्टल' बरामद किए गए। आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन और आधार कार्ड भी जब्त किया गया है, जिसके आधार पर अब उसके अन्य साथियों की तलाश की जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में है कछुओं की भारी मांग
आरोपी जाहिद अली ने पूछताछ में खुलासा किया कि वह फतेहगढ़ और आसपास के जिलों की नदियों और तालाबों से कछुए एकत्रित करता था। इन कछुओं को पहले कानपुर के स्थानीय तस्करों तक पहुंचाया जाता था, जहां से इन्हें बिहार और बंगाल के रास्ते अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेजा जाता था। जांच में सामने आया है कि इन कछुओं की मांग चीन और हांगकांग जैसे देशों में सबसे अधिक है।
तस्करों का मुख्य उद्देश्य इन कछुओं के मांस और उनकी झिल्ली का उपयोग करना होता है। चीन और हांगकांग में इनसे शक्तिवर्धक दवाएं और अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी भारी कीमत मिलती है। यही कारण है कि तस्करों का एक बड़ा नेटवर्क इन दुर्लभ जीवों के शिकार में सक्रिय है।
यूपी की नदियों पर तस्करों की नजर
एसटीएफ की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कछुओं की 29 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से 15 प्रजातियां उत्तर प्रदेश की जलधाराओं में मौजूद हैं। इनमें से 11 प्रजातियां तस्करों के निशाने पर रहती हैं। राज्य की प्रमुख नदियां जैसे गंगा, यमुना, चंबल, गोमती, घाघरा और गंडक तस्करों के लिए अवैध शिकार का प्रमुख केंद्र बनी हुई हैं।
वन विभाग और एसटीएफ ने आरोपी जाहिद अली के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह के तार और किन-किन शहरों से जुड़े हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क के मुख्य सरगनाओं को पकड़ने के लिए आगे की कार्रवाई जारी रहेगी।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!