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कानपुर: आईआईटी के रिटायर्ड अधिकारी को 5 दिन डिजिटल अरेस्ट कर 16.50 लाख की ठगी

सीसामऊ में आईआईटी कानपुर से रिटायर्ड आफिस सुपरिटेंडेंट को मनी लांड्रिंग केस में शामिल होने का झांसा देकर साइबर ठगों ने 16.55 लाख की ठगी कर ली। ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) अफसर बनकर ठगों ने बुजुर्ग को धमका कर करीब 5 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा और बुजुर्ग व उनकी बेटी को मारने की धमकी भी दी।

मोहम्मद नवेद

मोहम्मद नवेद

एडिटर

10 अगस्त 20262 मिनट पढ़ें
कानपुर: आईआईटी के रिटायर्ड अधिकारी को 5 दिन डिजिटल अरेस्ट कर 16.50 लाख की ठगी
मूल स्रोत

ईडी अधिकारी बनकर बुजुर्ग को बनाया शिकार

कानपुर के सीसामऊ क्षेत्र में साइबर अपराधियों ने एक बेहद शातिर तरीके से आईआईटी कानपुर के एक सेवानिवृत्त ऑफिस सुपरिटेंडेंट को अपना निशाना बनाया है। 71 वर्षीय अजय कुमार को मनी लॉन्ड्रिंग के एक फर्जी मामले में फंसाने का डर दिखाकर उनसे 16.55 लाख रुपये की ठगी की गई है। ठगों ने खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का अधिकारी बताकर बुजुर्ग को पांच दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा।

पीड़ित अजय कुमार गांधी नगर इलाके में अकेले रहते हैं। उनकी बेटी बेंगलुरु में कार्यरत है। ठगों ने इस बात का फायदा उठाते हुए उन्हें लगातार मानसिक दबाव में रखा। वीडियो कॉल के जरिए बुजुर्ग पर निगरानी रखी गई और उन्हें घर से बाहर निकलने या किसी से संपर्क करने से पूरी तरह मना कर दिया गया।

वीडियो कॉल पर दी जान से मारने की धमकी

ठगी की शुरुआत 30 जुलाई को एक फोन कॉल से हुई। कॉलर ने दावा किया कि बुजुर्ग का नाम एक गंभीर मनी लॉन्ड्रिंग केस में सामने आया है। जब अजय कुमार ने इन आरोपों को निराधार बताया, तो ठगों ने उन्हें पुलिस कार्रवाई की धमकी देकर डरा दिया। इसके बाद शुरू हुआ डिजिटल अरेस्ट का सिलसिला, जो पांच दिनों तक जारी रहा।

इस दौरान अपराधियों ने न केवल बुजुर्ग को धमकाया, बल्कि उनकी बेटी को भी जान से मारने की धमकी दी, जिससे पीड़ित पूरी तरह टूट गए। ठगों ने उन्हें विश्वास दिलाया कि यदि वे मामले को सुलझाना चाहते हैं, तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के नाम पर पैसे जमा करने होंगे। डर के साये में जी रहे बुजुर्ग ने अपनी जमा पूंजी से 16.55 लाख रुपये ठगों द्वारा बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।

पुलिस जांच में जुटी

पैसे ट्रांसफर करने के बाद जब ठगों का दबाव कम नहीं हुआ, तब अजय कुमार को अपने साथ हुई धोखाधड़ी का एहसास हुआ। उन्होंने तुरंत साइबर सेल में जाकर अपनी आपबीती सुनाई और औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। सीसामऊ थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है।

थाना प्रभारी अभय सिंह के अनुसार, पुलिस अब उन बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है जिनमें पीड़ित ने पैसे ट्रांसफर किए थे। साइबर सेल की टीम उन फोन नंबरों और आईपी एड्रेस की भी पड़ताल कर रही है जिनका इस्तेमाल इस अपराध को अंजाम देने के लिए किया गया था। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों को देखते हुए एक चेतावनी है। साइबर विशेषज्ञ लगातार सलाह देते हैं कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी को अरेस्ट नहीं करती है। किसी भी अनजान व्यक्ति के दबाव में आकर वित्तीय लेनदेन करना खतरनाक साबित हो सकता है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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