कानपुर: 1160 कंपनियों पर EPFO का शिकंजा, पीएफ से बाहर किए गए कर्मचारियों को जोड़ने के निर्देश
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के कानपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने कर्मचारियों के पीएफ अधिकारों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-I, शाहिद इकबाल ने जब कंपनियों के कर्मचारी रेमिटेंस और चालानों की जांच की, तो एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के कानपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा अधिकारों के प्रति सख्ती बरतते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-I शाहिद इकबाल द्वारा कंपनियों के रेमिटेंस और चालानों की गहन समीक्षा के दौरान एक गंभीर अनियमितता सामने आई। जांच में पाया गया कि कई प्रतिष्ठानों ने अपने रिकॉर्ड में कर्मचारियों की संख्या में अचानक कटौती की है, जिससे बड़ी संख्या में श्रमिक पीएफ और सामाजिक सुरक्षा के लाभ से वंचित हो गए हैं।
प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों की कंपनियों को नोटिस
ईपीएफओ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कानपुर मंडल की कुल 1,160 कंपनियों को नोटिस जारी किए हैं। ये नोटिस मुख्य रूप से उन औद्योगिक क्षेत्रों की इकाइयों को भेजे गए हैं जहां कर्मचारियों की संख्या में हेरफेर की आशंका है। इनमें उन्नाव का लेदर क्लस्टर, पनकी, दादानगर, रूमा, जाजमऊ, कानपुर देहात, फतेहपुर और झांसी के औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं। इन सभी कंपनियों को अपने रिकॉर्ड का पुनर्मूल्यांकन करने और पात्र कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से ईपीएफओ पोर्टल पर पंजीकृत करने का निर्देश दिया गया है।
ईपीएफओ द्वारा शुरू किए गए 'कर्मचारी नामांकन अभियान (EEC-2026)' का उद्देश्य उन कर्मचारियों को सुरक्षा के दायरे में लाना है जो अब तक इससे बाहर थे। इस अभियान के तहत कंपनियों को एक विशेष अवसर दिया गया है कि वे बिना किसी भारी जुर्माने के अपने छूटे हुए कर्मचारियों का पंजीकरण पूरा कर लें। यह कदम उन श्रमिकों के लिए राहत भरा है जो लंबे समय से पीएफ लाभ से वंचित थे।
कंपनियों के लिए राहत और नियम
EEC-2026 अभियान के तहत नियोक्ताओं को विशेष छूट प्रदान की गई है। यदि कोई कंपनी अब कर्मचारियों को जोड़ती है, तो उन्हें केवल कर्मचारी के हिस्से का अंशदान, नियमानुसार ब्याज और मात्र 100 रुपये का प्रशासनिक शुल्क जमा करना होगा। यह व्यवस्था कंपनियों को कानूनी कार्रवाई और बड़े जुर्माने से बचने का एक मौका देती है, साथ ही यह सुनिश्चित करती है कि कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
ईपीएफओ ने स्पष्ट किया है कि सामाजिक सुरक्षा का अधिकार हर कर्मचारी का मौलिक हक है। कंपनियों द्वारा की गई कटौती न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह श्रमिकों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है। इसलिए, विभाग ने कंपनियों को चेतावनी दी है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने रिकॉर्ड को दुरुस्त करें अन्यथा उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी विभागों और ठेकेदारों पर जिम्मेदारी
ईपीएफओ ने केवल निजी कंपनियों पर ही नहीं, बल्कि सरकारी विभागों पर भी अपनी नजरें टिका दी हैं। नगर निगम, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), जिला शिक्षा अधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी जैसे मुख्य नियोक्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीन काम करने वाले ठेकेदारों की गतिविधियों पर निगरानी रखें। अक्सर ठेके पर काम करने वाले मजदूर पीएफ लाभ से वंचित रह जाते हैं, जिसे रोकने के लिए इन विभागों को जवाबदेह बनाया गया है।
इन सरकारी विभागों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उनके यहां कार्यरत प्रत्येक ठेका कर्मचारी का पीएफ खाता सक्रिय हो और उसमें नियमित अंशदान जमा हो रहा हो। ईपीएफओ का स्पष्ट मानना है कि यदि मुख्य नियोक्ता सतर्क रहेंगे, तो ठेकेदारों द्वारा की जाने वाली अनियमितताओं पर लगाम लगाना आसान होगा।
आने वाले दिनों में ईपीएफओ की टीमें इन औद्योगिक क्षेत्रों और संबंधित विभागों के रिकॉर्ड की औचक जांच कर सकती हैं। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कानपुर मंडल का कोई भी पात्र कर्मचारी अपने सामाजिक सुरक्षा लाभ से वंचित न रहे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी इस प्रकार की निगरानी जारी रहेगी ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!