कानपुर: सीए को 'डिजिटल अरेस्ट' कर ठगे 2.60 लाख, पुलिस कमिश्नर के सामने आई ठग की कॉल
Kanpur cyber crime digital arrest case CA extortion demand live call update. क्राइम ब्रांच का एसीपी बताकर साइबर ठग ने एक सीए (चार्टर्ड अकाउंटेंट) को डिजिटल अरेस्ट कर लिया। ठग ने अश्लील वीडियो देखने पर रिपोर्ट दर्ज होने की बात कहकर तीन दिन अपनी कैद में रखा और जेल भेजने की धमकी देकर 2.60 लाख रुपये वसूल लिए।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

डिजिटल अरेस्ट का खौफ: सीए को तीन दिन तक बनाया बंधक
कानपुर में साइबर अपराधियों ने एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) को अपना निशाना बनाते हुए 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर लाखों रुपये की ठगी की है। पीड़ित सीए प्रशांत कुमार को खुद को क्राइम ब्रांच का एसीपी बताने वाले एक ठग ने फोन किया और अश्लील वीडियो देखने का आरोप लगाकर डराया-धमकाया। इस दौरान ठग ने उन्हें तीन दिनों तक मानसिक रूप से कैद में रखा और जेल भेजने का डर दिखाकर कुल 2.60 लाख रुपये ऐंठ लिए।
घटना की शुरुआत 25 जुलाई की रात को हुई, जब कमला टॉवर निवासी सीए को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉलर ने खुद को दिल्ली के करोल बाग स्थित साइबर क्राइम का एसीपी प्रमोद कुमार राठौर बताया। उसने दावा किया कि सीए के मोबाइल पर अश्लील फिल्में देखी गई हैं, जिसके चलते उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। इस फर्जी दावे के जरिए ठग ने पीड़ित को घबराहट में डाल दिया और केस रफा-दफा करने के नाम पर वसूली शुरू कर दी।
पुलिस कमिश्नर के सामने आई ठग की कॉल
ठग की हिम्मत इतनी बढ़ गई कि उसने सोमवार को सीए से फिर से 20 हजार रुपये की मांग की। इस बार सीए अपने पिता बसंत लाल गुप्ता के साथ सीधे पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के कार्यालय पहुंचे। इसी दौरान ठग ने सीए को फिर से व्हाट्सएप कॉल कर दिया। ठग ने फोन पर कहा कि वह जांच के सिलसिले में इटावा में एक होटल में रुका है और होटल का खर्च चुकाने के लिए तुरंत 20 हजार रुपये भेजे, अन्यथा वारंट जारी कर दिया जाएगा।
पुलिस कमिश्नर के सामने हो रही इस बातचीत को अधिकारियों ने गंभीरता से सुना। कमिश्नर के निर्देश पर सीए ने ठग से कहा कि वह बैंक से पैसे निकालने आया है और शाम तक रकम का इंतजाम कर देगा। इस दौरान पुलिस की साइबर सेल ने तुरंत सक्रिय होकर मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने पीड़ित के मोबाइल से करीब 20 पेज की चैट और ट्रांजेक्शन का विवरण निकाला है।
साइबर सेल की जांच और कानूनी कार्रवाई
पीड़ित सीए ने पुलिस को बताया कि ठग ने उन्हें एक लिंक भेजा था और उनकी घबराहट का फायदा उठाकर अलग-अलग यूपीआई नंबरों और स्कैनरों के जरिए 3 हजार से लेकर 21 हजार रुपये तक की कई किस्तों में कुल 2.60 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए। पुलिस ने फीलखाना थाने में इस मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया है और साइबर सेल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगालने में जुटी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर हो रही यह ठगी एक गंभीर अपराध है। किसी भी सरकारी अधिकारी द्वारा फोन पर इस तरह से पैसे की मांग नहीं की जाती है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि यदि कोई खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या व्हाट्सएप पर डराता है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर सेल को सूचित करें।
बढ़ते साइबर अपराधों पर पुलिस की नजर
कानपुर पुलिस अब उन बैंक खातों और यूपीआई आईडी की जांच कर रही है जिनका इस्तेमाल ठगों ने पैसे लेने के लिए किया था। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही इन खातों के जरिए ठगों की लोकेशन का पता चल जाएगा। इस मामले ने एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और साइबर अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस को उजागर कर दिया है, जहां अपराधी अब पुलिस कमिश्नर की मौजूदगी में भी ठगी करने से नहीं डर रहे हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
