कैथल: साधु हत्याकांड के बाद महंत की काली करतूतें आईं सामने, ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
कैथल के गांव बाबा लदाना में साधु मर्डर केस के मामले में पकड़े गए महंत पर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने कहा कि महंत दूजपुरी पहले भी विवादों में रहा है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

साधु की हत्या के बाद खुला राज, महंत के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
हरियाणा के कैथल जिले के गांव बाबा लदाना स्थित राजपुरी डेरे में हुई साधु शिव शंकर पुरी की नृशंस हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना के बाद डेरे के मुख्य महंत दूजपुरी उर्फ धर्मेंद्र के खिलाफ ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि महंत का व्यवहार लंबे समय से संदिग्ध था और वह डेरे की गरिमा को तार-तार कर रहा था।
ग्रामीणों ने महंत पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि वह रात के अंधेरे में अपनी गाड़ी में युवतियों को घुमाता था। स्थानीय निवासियों के अनुसार, डेरे में बाहरी महिलाओं का आना-जाना लगा रहता था और महंत के उन महिलाओं के साथ अनैतिक संबंध थे। कई बार ग्रामीणों ने उसे रंगेहाथ पकड़ने का प्रयास भी किया, लेकिन डेरे के प्रभाव के कारण लोग चुप रहे।
गाली-गलौज और अवैध वसूली के आरोप
स्थानीय निवासी कृष्ण कुमार ने बताया कि महंत दूजपुरी का व्यवहार बेहद अभद्र था और वह ग्रामीणों से गाली-गलौज करता था। आरोप है कि 2018 में एक महिला के साथ दुर्व्यवहार करने के कारण उसे गद्दी से हटाया गया था, लेकिन बाद में उसने फिर से कब्जा कर लिया। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि वह डेरे के चढ़ावे की राशि का दुरुपयोग कर उत्तर प्रदेश में संपत्ति खरीद रहा था।
दलबीर सिंह नामक ग्रामीण ने बताया कि डेरे में हुई इस हत्या की घटना से गांव में भारी शोक और आक्रोश है। उन्होंने मांग की है कि महंत के चरित्र और उसके द्वारा किए गए वित्तीय घोटालों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि डेरे की पवित्रता को दूजपुरी ने अपने निजी स्वार्थों के लिए नष्ट कर दिया था।
पुलिस की कार्रवाई और जांच का दायरा
डीएसपी सुशील प्रकाश ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस ने महंत दूजपुरी सहित कुल पांच आरोपियों को हिरासत में लिया है। इनमें लवकेश पुरी, होशियार सिंह, रजत और रवि उर्फ भोला शामिल हैं। पुलिस ने मृतक साधु के शव को पोस्टमार्टम के लिए नागरिक अस्पताल भेज दिया है और उनके परिजनों को सूचित कर दिया गया है।
जांच अधिकारी इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि हत्या के पीछे का मुख्य कारण क्या था। क्या यह डेरे की संपत्ति का विवाद था या फिर कोई अन्य अनैतिक राज छिपाने के लिए साधु की जान ली गई? पुलिस फिलहाल सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर पूछताछ कर रही है।
ऐतिहासिक डेरे की विरासत और वर्तमान स्थिति
बाबा राजपुरी का यह डेरा करीब 400 साल पुराना है और इसका आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है। स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस के गुरु तोतापुरी भी इसी डेरे से जुड़े रहे हैं। डेरे के पास लगभग 80 एकड़ उपजाऊ भूमि और 135 पशु हैं, जो श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए हैं। यहां प्रतिदिन चार बार आरती होती है और दशहरे के बाद यहां विशाल मेला लगता है।
इतनी समृद्ध विरासत होने के बावजूद, वर्तमान में महंत दूजपुरी के दौर में डेरा विवादों के केंद्र में आ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर कभी आध्यात्मिक शांति और सेवा का भाव था, वहां अब महंत की अय्याशी और आपराधिक गतिविधियों के कारण डेरे की साख गिर गई है। अब पूरे क्षेत्र की नजरें पुलिस की जांच पर टिकी हैं कि इस हत्याकांड के पीछे के और कितने गहरे राज सामने आते हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!