कैमूर: आयुष्मान कार्ड के लिए दर-दर भटक रहा ग्रामीण, मुखिया ने बताया मानसिक रूप से बीमार
कैमर के भभुआ प्रखंड की कैथी पंचायत में ग्रामीण को आयुष्मानस्मार्ट कार्ड न मिलने का मामला सामने आया है। पीड़ित श्रीराम सिंह का आरोप है कि उनका कार्ड 2022 में बन चुका है, लेकिन उन्हें अब तक भौतिक कार्ड प्राप्त नहीं हुआ है।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

बिहार के कैमूर जिले के भभुआ प्रखंड स्थित कैथी पंचायत से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक ग्रामीण ने आरोप लगाया है कि उसे सरकारी योजना के तहत मिलने वाला आयुष्मान स्मार्ट कार्ड अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। पीड़ित का दावा है कि उनका कार्ड वर्ष 2022 में ही स्वीकृत हो चुका था, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण वह आज भी अपने अधिकारों से वंचित है।
क्या है पूरा मामला?
कैथी पंचायत के बगैचा गांव के निवासी श्रीराम सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने और अपने तीन बेटों- आदित्य, सोनू और सनी के नाम पर आयुष्मान कार्ड के लिए आवेदन किया था। उनका कहना है कि वर्ष 2022 में ही उनके कार्ड बन गए थे, लेकिन उन्हें भौतिक रूप से कार्ड प्राप्त नहीं हुए हैं। श्रीराम सिंह का आरोप है कि जब भी वे पंचायत भवन या सरकारी दफ्तरों में अपने कार्ड के बारे में पूछताछ करने जाते हैं, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। उन्हें अक्सर यह सलाह दी जाती है कि वे किसी निजी दुकान पर जाकर पैसे देकर अपना कार्ड निकलवा लें।
पीड़ित श्रीराम सिंह ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि वे एक गरीब व्यक्ति हैं और बार-बार दफ्तरों के चक्कर काट कर थक चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि उन्हें जल्द ही उनका कार्ड नहीं मिला, तो वे उच्च अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज कराएंगे और कानूनी रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।
मुखिया ने आरोपों को किया खारिज
जब इस मामले पर कैथी पंचायत के मुखिया अनिल कुमार सिंह से संपर्क किया गया, तो उन्होंने पीड़ित के सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया। मुखिया ने श्रीराम सिंह के दावों को गलत बताते हुए कहा कि यह व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ है। मुखिया के अनुसार, श्रीराम सिंह का कोई भी काम पंचायत में बकाया नहीं है और वे बिना किसी ठोस आधार के कागजात लेकर सरकारी दफ्तरों में घूमते रहते हैं।
मुखिया अनिल कुमार सिंह ने आगे कहा कि पंचायत भवन में सभी सरकारी योजनाओं का काम सुचारू रूप से चल रहा है। उन्होंने दावा किया कि आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र से लेकर आयुष्मान कार्ड और पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों को समय पर दिया जा रहा है। उन्होंने किसी भी प्रकार की धांधली या लापरवाही की बात से साफ इनकार किया है।
प्रशासनिक स्तर पर जांच की मांग
एक तरफ पीड़ित का कहना है कि उसे सरकारी लाभ नहीं मिल रहा है, तो दूसरी तरफ जनप्रतिनिधि इसे मानसिक भ्रम बता रहे हैं। इस विरोधाभासी स्थिति ने स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना दिया है। अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन इस मामले को संज्ञान में लेता है और क्या श्रीराम सिंह के दावों की सच्चाई की जांच की जाती है।
आयुष्मान भारत योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करना है। यदि किसी पात्र व्यक्ति को कार्ड मिलने में वर्षों की देरी हो रही है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि यदि प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप करे और रिकॉर्ड की जांच करे, तो सच्चाई सामने आ सकती है और पीड़ित को उसका हक मिल सकता है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!