जोधपुर: 132 साल बाद ओल्ड कैंपस में स्थापित हुई महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय की प्रतिमा, कल होगा अनावरण
पूर्व प्रेसिडेंट ने भामाशाहों के साथ मिलकर चलाया अभियान; कल होगा अनावरण। 132 साल बाद ओल्ड-कैंपस में लगी जसवंत सिंह-द्वितीय की प्रतिमा।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

जोधपुर के ऐतिहासिक ओल्ड कैंपस में एक महत्वपूर्ण क्षण के तहत महाराजा जसवंत सिंह (द्वितीय) की प्रतिमा स्थापित की गई है। यह आयोजन 132 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद संपन्न हुआ है, जो शहर के शैक्षणिक और सांस्कृतिक इतिहास में एक नई कड़ी जोड़ता है। प्रतिमा के अनावरण का भव्य कार्यक्रम सोमवार को आयोजित किया जाएगा, जिसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
भामाशाहों के सहयोग से पूरा हुआ संकल्प
इस प्रतिमा को स्थापित करने का बीड़ा पूर्व प्रेसिडेंट अरविंद सिंह भाटी ने उठाया था। उन्होंने इस कार्य को एक अभियान के रूप में लिया और स्थानीय भामाशाहों को इससे जोड़ा। चार प्रमुख भामाशाहों के आर्थिक सहयोग से न केवल प्रतिमा का निर्माण संभव हुआ, बल्कि अनावरण कार्यक्रम की रूपरेखा भी तैयार की गई। आयोजकों का मानना है कि कॉलेज के संस्थापक की प्रतिमा का न होना एक कमी थी, जिसे अब पूरा कर लिया गया है।
जयपुर के कुशल कारीगरों द्वारा तैयार की गई यह प्रतिमा पंच धातु से बनी है। इसकी ऊंचाई लगभग 8.50 फीट है और इसका वजन 350 से 400 किलोग्राम के बीच है। प्रतिमा को स्थापित करने की प्रक्रिया 2024 में विश्वविद्यालय से अनुमति मिलने के बाद शुरू हुई थी, जिसके बाद जनवरी 2025 में इसका भूमि पूजन संपन्न हुआ था।
ऐतिहासिक महत्व और कार्यक्रम की रूपरेखा
जसवंत कॉलेज की स्थापना वर्ष 1893 में हुई थी, जो उस समय जोधपुर का पहला उच्च शिक्षा संस्थान था। यह कॉलेज शुरुआत में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संबद्ध था। बाद में 1962 में इसे जोधपुर विश्वविद्यालय का हिस्सा बनाया गया और 1992 में इसका नाम बदलकर जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय कर दिया गया। इतने दशकों बाद संस्थापक की प्रतिमा का लगना संस्थान के लिए एक गौरवपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
सोमवार को होने वाले अनावरण समारोह में कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर, राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, विधायक बाबू सिंह राठौड़ और राजेंद्र राठौड़ सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के शामिल होने की पुष्टि की गई है।
संस्थापक के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि
पूर्व प्रेसिडेंट अरविंद सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा आर्थिक सहयोग न मिलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने इसे महाराजा जसवंत सिंह (द्वितीय) के प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि बताया। उनके अनुसार, विश्वविद्यालय की यह जिम्मेदारी थी कि वह अपने संस्थापक को उनकी जयंती या पुण्यतिथि पर याद रखे, लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ, तो समाज के जागरूक लोगों ने आगे आकर स्वयं इस जिम्मेदारी को निभाया।
वर्तमान में ओल्ड कैंपस परिसर को इस आयोजन के लिए विशेष रूप से सजाया गया है। प्रतिमा स्थापना के साथ ही अब यह परिसर अपने संस्थापक की स्मृति को संजोए रखने के लिए तैयार है। स्थानीय लोगों और पूर्व छात्रों में इस प्रतिमा के अनावरण को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है, जो जोधपुर की शैक्षणिक विरासत को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!