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झज्जर: कुएं में गिरे बछड़े को बचाने उतरे चार लोगों की दर्दनाक मौत, प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप

एक ही परिवार के तीन लोगों समेत चार युवाओं की कुंए में डूबकर मौत हो गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह मौत कुंए में डूबने से नहीं बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की गैरजिम्मेदारी के कारण हुई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

20 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 888
झज्जर: कुएं में गिरे बछड़े को बचाने उतरे चार लोगों की दर्दनाक मौत, प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप
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मुनीमपुर गांव में मातम, एक ही परिवार के तीन सदस्यों समेत चार की जान गई

झज्जर जिले के मुनीमपुर गांव में रविवार रात एक हृदयविदारक घटना सामने आई, जहां कुएं में गिरे बछड़े को बचाने के प्रयास में चार युवाओं की मौत हो गई। मृतकों में एक ही परिवार के तीन सदस्य शामिल हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि प्रशासन ने समय रहते तत्परता दिखाई होती, तो इन चारों युवाओं की जान बचाई जा सकती थी। घटना के बाद से पूरे इलाके में शोक की लहर है और स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति भारी आक्रोश व्याप्त है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुएं से बछड़े के रंभाने की आवाज सुनकर ये युवक उसे बचाने के लिए नीचे उतरे थे। हालांकि, कुएं के भीतर जहरीली गैस या ऑक्सीजन की कमी के कारण वे अंदर ही फंस गए। अंदर मौजूद नरेंद्र ने बाहर खड़े लोगों को चिल्लाकर चेतावनी दी थी कि वे नीचे न आएं, क्योंकि वहां सांस लेना मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद, समय पर बचाव कार्य शुरू न होने से स्थिति बिगड़ती चली गई।

प्रशासन पर देरी और संसाधनों के अभाव का आरोप

ग्रामीणों ने दावा किया है कि घटना की सूचना देने के करीब पौने दो घंटे बाद पुलिस की डायल 112 टीम मौके पर पहुंची। आरोप है कि पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम पहुंचने के बाद भी बचाव कार्य में काफी सुस्ती बरती गई। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तब तक चारों युवक कुएं के अंदर जीवित थे। अंततः, ग्रामीणों ने खुद अपनी जान जोखिम में डालकर जेसीबी और सेप्टिक टैंक की मदद से कुएं को खोदना शुरू किया और फायर ब्रिगेड के मास्क पहनकर नीचे उतरे।

अस्पताल ले जाते समय भी अव्यवस्थाओं का आलम रहा। ग्रामीणों के मुताबिक, मौके पर पहुंची एंबुलेंस में ऑक्सीजन जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं थीं। एक पीड़ित को तो एंबुलेंस न मिलने के कारण पुलिस की पीसीआर गाड़ी में अस्पताल ले जाना पड़ा। ग्रामीणों का मानना है कि यदि एंबुलेंस में ऑक्सीजन होती, तो शायद उन्हें अस्पताल तक जीवित बचाया जा सकता था।

पुलिस कमिश्नर का दौरा और ग्रामीणों का विरोध

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस कमिश्नर डॉ. राजश्री सिंह ने मुनीमपुर गांव और नागरिक अस्पताल का दौरा किया। इस दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन के प्रति अपना गुस्सा जाहिर करते हुए उन्हें 'जीरो' करार दिया। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि अब दुख जताने का कोई अर्थ नहीं है, क्योंकि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई। कमिश्नर ने ग्रामीणों के आरोपों पर जांच का आश्वासन दिया है और कहा है कि यदि कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बादली से कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स ने भी मौके पर पहुंचकर घटना पर गहरा दुख जताया। उन्होंने इसे प्रशासनिक विफलता करार देते हुए कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है।

पोस्टमार्टम से पहले कड़ा फैसला लेने की चेतावनी

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर गौर नहीं किया जाता और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित नहीं होती, तब तक वे शवों का पोस्टमार्टम नहीं होने देंगे। फिलहाल, गांव में भारी तनाव का माहौल है और लोग प्रशासन से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाओं की तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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