मध्य प्रदेश छात्र राजनीति में जयस की दस्तक: एबीवीपी और एनएसयूआई के लिए बढ़ी चुनौती
की छात्र राजनीति में पहली बार जयस की एंट्री: सभी कॉलेजों में उतारेगा उम्मीदवार, आदिवासी युवाओं को देगा मौका; ABVP-NSUI के सामने नई चुनौती

मोहम्मद नवेद
एडिटर

मध्य प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में लंबे समय से चली आ रही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) की द्विपक्षीय राजनीति में अब एक नया मोड़ आने वाला है। जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) ने राज्य के आगामी छात्रसंघ चुनावों में अपने उम्मीदवार उतारने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। नौ वर्षों के अंतराल के बाद प्रदेश में होने जा रहे इन चुनावों में जयस की सक्रिय भागीदारी से चुनावी समीकरणों में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
आदिवासी बहुल क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
जयस के राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकेश मुजाल्दे ने हाल ही में इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस निर्णय की घोषणा की। संगठन की रणनीति के तहत सबसे पहले मालवा और निमाड़ क्षेत्र के कॉलेजों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां आदिवासी विद्यार्थियों की संख्या काफी अधिक है। जयस के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल बघेल ने स्पष्ट किया है कि संगठन राज्य के सभी कॉलेजों में अपने प्रत्याशी उतारेगा और इसके लिए जल्द ही जमीनी स्तर पर संपर्क अभियान शुरू किया जाएगा।
संगठन का मुख्य उद्देश्य आदिवासी विद्यार्थियों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाना है। इसमें छात्रवृत्ति, रोजगार के अवसर, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और कॉलेजों से जुड़ी स्थानीय समस्याएं शामिल हैं। जयस का मानना है कि अब तक इन विद्यार्थियों की आवाज को मुख्यधारा के छात्र संगठनों द्वारा नजरअंदाज किया जाता रहा है, जिसे वे अब एक मंच प्रदान करेंगे।
पुराने मुद्दों को लेकर युवाओं के बीच पैठ
छात्र राजनीति में उतरने से पहले ही जयस प्रदेश में युवाओं से जुड़े कई ज्वलंत मुद्दों पर मुखर रहा है। संगठन ने पूर्व में बैकलॉग पदों पर भर्ती और पटवारी भर्ती परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग हटाने जैसे विषयों को लेकर भोपाल और इंदौर सहित कई जिलों में प्रदर्शन किए हैं। अब इन्हीं मुद्दों को कॉलेज परिसरों के भीतर ले जाकर छात्रों को लामबंद करने की तैयारी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जयस की एंट्री से एबीवीपी और एनएसयूआई के लिए अपनी पकड़ बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा। विशेष रूप से उन कॉलेजों में जहां आदिवासी छात्रों का वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभाता है, वहां त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है। यह पहली बार होगा जब इन दो पारंपरिक संगठनों को किसी तीसरे मजबूत छात्र संगठन का सामना करना पड़ेगा।
नौ साल बाद हो रहे हैं चुनाव
मध्य प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं। राज्य सरकार ने सितंबर माह में चुनाव कराने की तैयारी शुरू कर दी है, हालांकि अभी तक आधिकारिक तारीखों की घोषणा नहीं की गई है। चुनाव की आहट के साथ ही प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
जयस का गठन वर्ष 2013 में हुआ था और पिछले दो वर्षों से संगठन ने अपने छात्र विंग को मजबूती देने पर काम किया है। अब देखना यह होगा कि छात्र राजनीति के इस नए प्रयोग में जयस को कितनी सफलता मिलती है और यह पारंपरिक छात्र संगठनों के वर्चस्व को किस हद तक प्रभावित कर पाता है।

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मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!