जयपुर में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़: ई-मित्र के नाम पर नौकरी का झांसा देकर लाखों की ठगी, 11 गिरफ्तार
Jaipur fake call center busted, job scam fraud arrests, CST team raid. पुलिस ने मौके से कॉल सेंटर संचालक सलमान सहित कुल 11 युवक-युवतियों को पकड़ा है। साथ ही 15 कंप्यूटर, 2 लैपटॉप और 9 मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

जवाहर नगर इलाके में चल रहा था अवैध कारोबार
जयपुर में पुलिस की सीएसटी (CST) टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। यह अवैध कॉल सेंटर जवाहर नगर थाना क्षेत्र की सिंधी कॉलोनी स्थित रॉयल अपार्टमेंट में संचालित किया जा रहा था। पुलिस ने मौके से कॉल सेंटर के संचालक सलमान सहित कुल 11 युवक-युवतियों को हिरासत में लिया है। इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने 15 कंप्यूटर, 2 लैपटॉप और 9 मोबाइल फोन जब्त किए हैं, जिनका उपयोग ठगी के लिए किया जाता था।
स्पेशल पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश के अनुसार, यह गिरोह काफी समय से सक्रिय था और लोगों को ई-मित्र आईडी दिलाने के नाम पर ठग रहा था। आरोपियों का मुख्य काम राजस्थान और अन्य राज्यों के बेरोजगार युवाओं को ई-मित्र सेवाओं के जरिए रोजगार दिलाने का प्रलोभन देना था। वे लोगों को विश्वास दिलाते थे कि ई-मित्र केंद्र खोलकर वे अच्छी कमाई कर सकते हैं, और इसी झांसे में आकर लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा बैठते थे।
40 से 70 हजार रुपये तक की वसूली
डीसीपी क्राइम संजीव नैन ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने अलग-अलग पीड़ितों से 40 हजार से लेकर 70 हजार रुपये तक की मोटी रकम वसूली थी। ठगों ने न तो किसी को रोजगार उपलब्ध कराया और न ही ई-मित्र की कोई वैध सेवा प्रदान की। सुनियोजित तरीके से लोगों को जाल में फंसाकर उनसे पैसे ऐंठने का यह सिलसिला पिछले दो से तीन वर्षों से लगातार चल रहा था।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह बहुत ही शातिर तरीके से काम कर रहा था। वे पीड़ितों को कॉल करके उन्हें सरकारी योजनाओं और ई-मित्र से जुड़ी कमाई की झूठी उम्मीदें दिखाते थे। जब पीड़ित पैसे जमा कर देते थे, तो उसके बाद आरोपी उनसे संपर्क तोड़ लेते थे। इस तरह से उन्होंने बड़ी संख्या में लोगों को अपना शिकार बनाया है।
डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच जारी
छापेमारी में बरामद किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की अब फॉरेंसिक जांच करवाई जा रही है। पुलिस का मानना है कि इन कंप्यूटरों और मोबाइल फोन के डेटा से ठगी के पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकेगा। जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कुल कितने लोगों को ठगा है और इसमें और कौन-कौन से लोग शामिल हो सकते हैं।
पुलिस अब कॉल सेंटर के बैंक खातों और आर्थिक लेन-देन के रिकॉर्ड को खंगाल रही है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड्स की जांच के बाद ठगी की वास्तविक राशि और पीड़ितों की सटीक संख्या का पता चल पाएगा। इस मामले में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान के लिए भी पुलिस गहन पूछताछ कर रही है।
आगे की कार्रवाई
फिलहाल, हिरासत में लिए गए सभी 11 आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस फर्जी कॉल सेंटर के तार किसी बड़े अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े हैं। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की नौकरी या ई-मित्र आईडी के नाम पर लुभावने वादों से सावधान रहें और किसी भी अनजान व्यक्ति को पैसे देने से पहले पूरी जांच-पड़ताल जरूर करें।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
