जयपुर: स्कूल निरीक्षण के दौरान सीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमला, ग्रामीणों और नेताओं के दावों में फंसा विवाद
सीजेपी प्रवक्ता-कार्यकर्ताओं पर हमला मामला,ग्रामीणों को लीड करने वालों में बीजेपी से जुडे लोग भी शामिल,ग्रामीणों का नेतृत्व करने वाले लालचंद शर्मा बोले-मेरा मत है मैं किसी को भी वोट दे सकता हूं-अगर मैं हूं तो हूं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

जयपुर के बगरू स्थित रामपुरा गांव में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता आशुतोष रांका और उनके साथियों पर हुए हमले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। यह घटना तब हुई जब सीजेपी की टीम राजकीय प्राथमिक स्कूल रामपुरा कंवरपुरा का निरीक्षण करने पहुंची थी। इस दौरान वहां मौजूद ग्रामीणों ने टीम का कड़ा विरोध किया, जो देखते ही देखते मारपीट और पत्थरबाजी में बदल गया।
हमले के बाद आरोपों का दौर
सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया है कि उन पर हमला करने वाले लोग भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े कार्यकर्ता थे। रांका का दावा है कि स्कूल की बदहाली को उजागर करने के उद्देश्य से की गई उनकी यात्रा को राजनीतिक दबाव में रोकने की कोशिश की गई। घटना के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर इस बात की चर्चा तेज हो गई कि क्या यह हमला किसी सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा था।
दूसरी ओर, ग्रामीणों का नेतृत्व करने वाले लालचंद शर्मा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। लालचंद का कहना है कि वे किसी भी पार्टी से नहीं जुड़े हैं और यह ग्रामीणों का अपना मुद्दा था। उन्होंने तर्क दिया कि वे केवल अपने गांव के स्कूल की सुरक्षा और गरिमा के लिए वहां मौजूद थे। हालांकि, ग्रामीणों के एक वर्ग का यह भी कहना है कि पूरा गांव भाजपा समर्थक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे किसी पार्टी के इशारे पर काम कर रहे हैं।
विधायक का रुख और स्कूल का बजट
इस मामले में बगरू के भाजपा विधायक कैलाश वर्मा ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सीजेपी प्रवक्ता द्वारा ग्रामीणों को 'गुंडा' कहे जाने पर कड़ी नाराजगी जताई। विधायक ने स्पष्ट किया कि रामपुरा स्कूल के जीर्णोद्धार के लिए 18 लाख रुपये का बजट पहले ही स्वीकृत किया जा चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकारी स्तर पर काम की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, तो बाहरी लोगों को स्कूल में दखल देने की क्या आवश्यकता थी।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने चंदे के माध्यम से गांव में एक करोड़ रुपये की लागत से मंदिर का निर्माण कराया है। ग्रामीणों का दावा है कि यदि सरकार स्कूल के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाती है, तो वे स्वयं के संसाधनों से स्कूल का निर्माण करने में सक्षम हैं। उनका मानना है कि बाहरी संगठनों का हस्तक्षेप गांव के आंतरिक मामलों में अनावश्यक है।
घटनाक्रम और आगे की स्थिति
शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे जब सीजेपी की टीम स्कूल पहुंची, तो वहां पहले से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित थे। सीजेपी का आरोप है कि उन्हें स्कूल में प्रवेश करने से रोका गया और धक्का-मुक्की की गई। इस दौरान गाड़ियों में तोड़फोड़ की भी सूचना है। शंकरलाल शर्मा नामक स्थानीय निवासी ने बताया कि उन्होंने सीजेपी कार्यकर्ताओं को कई बार वापस जाने का आग्रह किया था, लेकिन जब वे नहीं माने तो स्थिति बिगड़ गई।
इस घटना के बाद सीजेपी ने प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। पार्टी के अन्य नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि हमलावरों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया, तो वे जयपुर में बड़ा आंदोलन करेंगे। वर्तमान में पुलिस मामले की जांच कर रही है और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर तथ्यों को खंगाला जा रहा है।
यह विवाद अब केवल एक स्कूल के निरीक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्थानीय राजनीति और बाहरी हस्तक्षेप के बीच एक बड़े बहस का मुद्दा बन गया है। ग्रामीणों का एकजुट होकर विरोध करना और सीजेपी का इसे राजनीतिक हमला बताना, दोनों ही पक्षों के दावों को संदिग्ध बनाता है। मामले में पुलिस की आगामी कार्रवाई ही स्पष्ट कर पाएगी कि हमले के पीछे के असल सूत्रधार कौन थे।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!