इंदौर: नौकरी के नाम पर छात्रों को फंसाने वाला कंसलटेंसी संचालक गिरफ्तार, 313 मार्कशीट जब्त
Indore job consultancy fraud owner arrested for holding students original marksheets for money. नौकरी दिलाने के नाम पर स्टूडेंट्स की ओरिजनल मार्कशीट रखने और वापस करने के एवज में 5 हजार रुपए की डिमांड करने वाले एक कंसलटेंसी के मालिक को पुलिस ने गिरफ्तार किया। उसके पास से 313 स्टूडेंट्स की 10वीं-12वीं की मार्कशीट मिली।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

इंदौर में नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले एक कंसलटेंसी संचालक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी ने न केवल नौकरी के नाम पर युवाओं से पैसे ऐंठे, बल्कि उनकी मूल शैक्षणिक दस्तावेज (मार्कशीट) भी अपने कब्जे में ले ली थीं। पुलिस की कार्रवाई में आरोपी के दफ्तर से 300 से अधिक छात्रों की मार्कशीट बरामद हुई हैं, जिससे इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है।
मार्कशीट के बदले वसूली का खेल
विजय नगर थाना क्षेत्र के ऑर्बिट मॉल में स्थित एक कंसलटेंसी ऑफिस में पुलिस ने दबिश दी। आरोपी मयंक सर्राफ 'AZFA इंटरप्राइजेज' नाम से फर्म चला रहा था। वह इंदौर में पढ़ाई करने वाले छात्रों को पार्ट-टाइम और फुल-टाइम नौकरी दिलाने का लालच देता था। जब छात्र नौकरी के लिए संपर्क करते, तो आरोपी उनसे उनकी 10वीं और 12वीं की ओरिजनल मार्कशीट जमा करवा लेता था। यह मार्कशीट सुरक्षा के नाम पर ली जाती थी, लेकिन बाद में यही छात्रों के लिए मुसीबत बन गई।
आरोपी मयंक ने कई छात्रों को टास्कअप, टेलीपरफॉर्मेंस और निजी बैंकों में नौकरी लगवाने का वादा किया था। नौकरी मिलने के बाद, वह प्रत्येक छात्र से 5 हजार रुपये की मांग करता था। यदि कोई छात्र पैसे देने में असमर्थ होता या देने से मना करता, तो आरोपी उनकी मूल मार्कशीट वापस करने से साफ इनकार कर देता था। इस तरह वह छात्रों को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था।
पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद विजय नगर पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच शुरू की। पुलिस ने जब कंसलटेंसी के ऑफिस पर छापा मारा, तो वहां से 313 छात्रों की ओरिजनल मार्कशीट बरामद की गईं। इतनी बड़ी संख्या में दस्तावेजों का मिलना यह दर्शाता है कि आरोपी ने बड़ी संख्या में युवाओं को अपना शिकार बनाया था। पुलिस ने आरोपी मयंक सर्राफ को हिरासत में लेकर उसके खिलाफ धोखाधड़ी और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी छात्रों पर लगातार पैसे देने का दबाव बनाता था। कई छात्र अपनी मार्कशीट वापस पाने के लिए दर-दर भटक रहे थे। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी ने अब तक कितने छात्रों से पैसे वसूले हैं और क्या इस रैकेट में कोई और भी शामिल है। आरोपी से पूछताछ जारी है, जिससे और भी खुलासे होने की उम्मीद है।
युवाओं के लिए सबक
यह मामला उन युवाओं के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो नौकरी की तलाश में किसी भी अनजान कंसलटेंसी पर भरोसा कर लेते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी निजी फर्म को अपनी मूल शैक्षणिक दस्तावेज सौंपने से पहले पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। सरकारी या प्रतिष्ठित संस्थानों में नौकरी के नाम पर कभी भी ओरिजनल दस्तावेज जमा नहीं करवाए जाते हैं।
फिलहाल, पुलिस उन सभी छात्रों से संपर्क करने की कोशिश कर रही है जिनकी मार्कशीट आरोपी के पास से बरामद हुई हैं। इस घटना ने इंदौर के जॉब मार्केट में सक्रिय फर्जी कंसलटेंसी के काले कारोबार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब शहर में चल रही अन्य कंसलटेंसी फर्मों की भी जांच करने की तैयारी कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
