इंदौर: 8 करोड़ के सरकारी गबन मामले में एक और गिरफ्तारी, आरोपी के खाते में मिले 13 लाख से ज्यादा
Indore government fund embezzlement case arrest police custody remand update. इंदौर। करीब ₹8 करोड़ की शासकीय धनराशि के गबन से जुड़े बहुचर्चित मामले में रावजी बाजार थाना पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के बैंक खाते में शासकीय मद से ₹13.72 लाख से अधिक की राशि ट्रांसफर होने के साक्ष्य मिले हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

इंदौर में करीब 8 करोड़ रुपये की सरकारी धनराशि के गबन से जुड़े एक बड़े मामले में रावजी बाजार थाना पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने इस मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसकी पहचान मनोज उर्फ हल्लू के रूप में हुई है। आरोपी पर सरकारी खजाने से निजी खातों में अवैध रूप से राशि ट्रांसफर करने का गंभीर आरोप है।
बैंक खाते में मिले 13.72 लाख रुपये
पुलिस जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपी मनोज के बैंक खाते में सरकारी मद से 13 लाख 72 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए थे। जांच अधिकारियों के अनुसार, सह-आरोपी रंजीत करोड़ ने सरकारी खजाने से यह राशि मनोज के खाते में भेजी थी। पुलिस का दावा है कि इस पूरी रकम का इस्तेमाल आरोपी और उसके सहयोगियों ने निजी स्वार्थ के लिए किया था।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी को स्थानीय अदालत में पेश किया, जहां से उसे तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। रिमांड के दौरान पुलिस अब इस बात की गहन पूछताछ कर रही है कि गबन की गई इस राशि का उपयोग किन-किन कार्यों में किया गया और इस पूरे षड्यंत्र में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ फर्जीवाड़ा
इस बहुचर्चित गबन मामले की शुरुआत 23 मार्च 2023 को हुई थी, जब तत्कालीन संयुक्त कलेक्टर मुनीष सिंह सिकरवार ने रावजी बाजार थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में मिलाप चौहान, रंजीत करोड़, मनीषा चौहान और राहुल चौहान समेत कई अन्य लोगों को नामजद किया गया था। पुलिस की अब तक की जांच में एक संगठित गिरोह का खुलासा हुआ है।
आरोपियों ने जिला कोषालय के सिस्टम में सेंध लगाकर उन बैंक खातों की जानकारी निकाली जो विफल (फेल) हो चुके थे। इसके बाद उन्होंने पात्र हितग्राहियों के बैंक खातों के स्थान पर अपने, अपने परिजनों, दोस्तों और परिचितों के बैंक खातों के नंबर सिस्टम में दर्ज कर दिए। इस प्रक्रिया के जरिए उन्होंने फर्जी स्वीकृति आदेश तैयार किए और सरकारी राशि को निजी खातों में डायवर्ट कर दिया।
देयकों को दोबारा जनरेट कर की गई धोखाधड़ी
जांच में यह भी पता चला है कि आरोपियों ने देयकों (बिल्स) को दोबारा जनरेट करने की तकनीक अपनाई थी, जिससे सरकारी खजाने को करीब 8 करोड़ रुपये का चूना लगा। यह मामला सरकारी तंत्र में सुरक्षा खामियों और मिलीभगत की ओर इशारा करता है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या कोषालय के किसी कर्मचारी या अधिकारी की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी राशि का गबन संभव था।
फिलहाल, पुलिस रिमांड के दौरान मनोज उर्फ हल्लू से पूछताछ के आधार पर अन्य फरार आरोपियों की धरपकड़ तेज कर दी गई है। इस मामले में आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि पुलिस गबन की पूरी राशि की रिकवरी के लिए भी प्रयास कर रही है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
