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इंदौर के कैंसर अस्पताल में राहत: अब आधी कीमत पर होगी PET स्कैन जांच, लीनियर एक्सीलेटर के लिए करना होगा इंतजार

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

3 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
इंदौर के कैंसर अस्पताल में राहत: अब आधी कीमत पर होगी PET स्कैन जांच, लीनियर एक्सीलेटर के लिए करना होगा इंतजार
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इंदौर के शासकीय कैंसर अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत भरी खबर सामने आई है। अस्पताल प्रशासन अगले एक से दो महीनों के भीतर पीईटी (PET) स्कैन की सुविधा शुरू करने की तैयारी में है। इस सुविधा के शुरू होने से मरीजों को निजी अस्पतालों की तुलना में काफी कम खर्च पर जांच की सुविधा मिल सकेगी। वर्तमान में निजी केंद्रों पर इस जांच के लिए मरीजों को करीब 20 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं, जबकि सरकारी अस्पताल में यह सुविधा लगभग 10 हजार रुपये के अनुमानित शुल्क पर उपलब्ध होगी।

पीपीपी मॉडल पर शुरू होगी जांच सेवा

एमजीएम मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार, नई कैंसर बिल्डिंग में पीईटी स्कैन सेवा को पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत संचालित किया जाएगा। निजी पार्टनर ने अपना सेटअप और आवश्यक फर्नीचर तैयार कर लिया है। जांच के लिए जरूरी विशेष डाई अहमदाबाद और अन्य बड़े शहरों से मंगवाई जाएगी। कॉलेज प्रशासन का प्रयास है कि इस जांच सुविधा को आयुष्मान भारत योजना के दायरे में भी लाया जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को इसका सीधा लाभ मिल सके। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा रहा है।

पीईटी स्कैन की उपयोगिता कैंसर के सटीक निदान में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह न केवल शरीर में कैंसर की शुरुआती अवस्था का पता लगाने में सक्षम है, बल्कि यह भी बताता है कि बीमारी शरीर के किन अन्य अंगों में फैल चुकी है। इसके अलावा, कीमोथैरेपी या रेडिएशन के असर की निगरानी करने और इलाज के बाद कैंसर की पुनरावृत्ति की जांच के लिए भी यह तकनीक अनिवार्य मानी जाती है। मस्तिष्क विकारों और हृदय संबंधी जटिलताओं को समझने में भी यह तकनीक डॉक्टरों के लिए मददगार साबित होती है।

43 करोड़ की मशीन के लिए अभी और इंतजार

जहां एक ओर पीईटी स्कैन की सुविधा मरीजों के लिए सुलभ होने जा रही है, वहीं अत्याधुनिक रेडिएशन थैरेपी के लिए मरीजों को अभी और इंतजार करना होगा। अस्पताल में 43 करोड़ रुपये की लागत से आने वाली 'लीनियर एक्सीलेटर' मशीन का बेस फ्रेम नीदरलैंड से इंदौर पहुंच चुका है। हालांकि, इस मशीन को स्थापित करने के लिए आवश्यक सिविल कार्य अभी भी अधूरे हैं। मशीन का मुख्य बंकर तो तैयार कर लिया गया है, लेकिन उससे जुड़े अन्य कक्षों का निर्माण कार्य अभी बाकी है।

निर्माण एजेंसी को काम पूरा करने के लिए दो महीने की अतिरिक्त मोहलत दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मशीन की स्थापना और तकनीकी परीक्षण के बाद इसे पूरी तरह चालू होने में लगभग छह महीने का समय लग सकता है। फिलहाल, शहर के इस एकमात्र सरकारी कैंसर अस्पताल में मरीजों को पुरानी कोबाल्ट मशीन के जरिए ही रेडिएशन दिया जा रहा है, जो आधुनिक मानकों के मुकाबले काफी पुरानी तकनीक है।

अस्पताल प्रशासन की प्राथमिकता

एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि पीईटी स्कैन सुविधा शुरू होने से शहर में कैंसर मरीजों को सबसे सस्ती दर पर जांच उपलब्ध होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि लीनियर एक्सीलेटर के लिए बंकर का निर्माण पूरा हो चुका है और शेष बचे सिविल कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य कैंसर के मरीजों को एक ही छत के नीचे आधुनिक और किफायती इलाज मुहैया कराना है।

अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या को देखते हुए इन सुविधाओं का विस्तार अत्यंत आवश्यक है। पीईटी स्कैन के आने से जहां निदान में सटीकता आएगी, वहीं लीनियर एक्सीलेटर के शुरू होने से रेडिएशन थैरेपी की गुणवत्ता में बड़ा सुधार होगा। आने वाले महीनों में अस्पताल की इन नई सेवाओं के शुरू होने से मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों की ओर रुख करने की मजबूरी कम हो जाएगी।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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