इंदौर: 10 करोड़ के लोन का झांसा देकर हुई 1 करोड़ की ठगी, कोर्ट के हस्तक्षेप से कारोबारी को वापस मिली रकम
Indore businessman gets back 1 crore cyber fraud money via court order. इंदौर के एक बड़े कारोबारी के साथ 10 करोड़ रुपए का लोन दिलाने के नाम पर हुई 1 करोड़ रुपए की साइबर ठगी के मामले में जिला कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पीड़ित कारोबारी को उसकी पूरी राशि वापस दिला दी। कोर्ट के आदेश के बाद बैंक ने आरोपी खातों में फ्रीज की गई 1 करोड़ रुपए की रकम कारोबारी के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर कर दी।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

लोन के नाम पर बिछाया गया था जाल
इंदौर के एक प्रतिष्ठित कारोबारी के साथ हुई साइबर धोखाधड़ी के मामले में जिला न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कारोबारी को 10 करोड़ रुपये का लोन दिलाने का लालच देकर एक संगठित गिरोह ने 1 करोड़ रुपये की ठगी की थी। कोर्ट के कड़े रुख और समय पर की गई कार्रवाई के कारण पीड़ित को उसकी पूरी राशि वापस मिल गई है। यह मामला साइबर अपराध के पीड़ितों के लिए एक बड़ी राहत और मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
घटना की शुरुआत तब हुई जब कारोबारी को अपने व्यवसाय के विस्तार के लिए 10 करोड़ रुपये के ऋण की आवश्यकता थी। इसी दौरान चेन्नई की एक फर्जी कंपनी के प्रतिनिधियों ने उनसे संपर्क किया और लोन दिलाने का दावा किया। आरोपियों ने कारोबारी का विश्वास जीतने के लिए उन्हें चेन्नई बुलाया और वहां 10 करोड़ रुपये का एक डिमांड ड्राफ्ट भी दिखाया। इस दिखावे के बाद उन्होंने कारोबारी से विभिन्न दस्तावेजों और स्टाम्प पेपर पर हस्ताक्षर करवा लिए।
प्रोसेसिंग फीस के नाम पर ऐंठी बड़ी रकम
आरोपियों ने लोन की प्रोसेसिंग फीस, ब्याज और अन्य बैंकिंग औपचारिकताओं का बहाना बनाकर कारोबारी से 1 करोड़ रुपये की राशि जमा करवा ली। पैसे मिलते ही आरोपियों ने डिमांड ड्राफ्ट वापस ले लिया और लोन जारी करने के नाम पर टालमटोल शुरू कर दी। जब काफी समय तक लोन नहीं मिला, तो कारोबारी को अपने साथ हुई धोखाधड़ी का अहसास हुआ।
ठगों ने अपना जाल और गहरा करने के लिए वीडियो कॉल का सहारा लिया। उन्होंने कारोबारी को 10 करोड़ रुपये नकद होने का दावा किया और अतिरिक्त 20 लाख रुपये की मांग की। ठगों ने कारोबारी को गुमराह करने के लिए तर्क दिया कि 10 करोड़ रुपये की नकदी का वजन लगभग 210 किलो होता है, जिसे वे जल्द ही डिलीवर कर देंगे। हालांकि, इस बार कारोबारी ने और अधिक भुगतान करने से इनकार कर दिया, जिससे आरोपी वहां से फरार हो गए।
न्यायालय के आदेश से मिली राहत
धोखाधड़ी का पता चलते ही पीड़ित ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से क्राइम ब्रांच और साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान साइबर सेल ने आरोपियों के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया, जिनमें 1 करोड़ रुपये की राशि मौजूद थी। हालांकि, इस राशि को वापस पाने के लिए पीड़ित को जिला कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट का बारीकी से अवलोकन किया। कोर्ट ने पाया कि कारोबारी के साथ सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी की गई है। इसके बाद 9 जुलाई को जिला न्यायालय ने एक्सिस बैंक को आदेश दिया कि फ्रीज की गई राशि 10 दिनों के भीतर पीड़ित के खाते में स्थानांतरित की जाए। कोर्ट के इस आदेश का पालन करते हुए 18 जुलाई को बैंक ने पूरी 1 करोड़ रुपये की राशि कारोबारी के खाते में वापस जमा कर दी।
कानूनी विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर ठगी के मामलों में रकम की वापसी अत्यंत जटिल प्रक्रिया होती है, क्योंकि ठग अक्सर पैसा कई खातों में घुमा देते हैं। इस मामले में समय रहते शिकायत दर्ज होने और पुलिस द्वारा खातों को फ्रीज करने की त्वरित कार्रवाई ने पीड़ित की पूंजी को सुरक्षित बचा लिया। यह मामला अब उन लोगों के लिए एक उदाहरण है जो साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने के बाद कानूनी प्रक्रिया के प्रति संशय में रहते हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
