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भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत: 7 वर्षों में 36 देशों से 274 भगोड़े वापस लाए गए

केंद्र सरकार ने मंगलवार को बताया कि पिछले 7 वर्षों में 36 देशों से 274 भगोड़ों को भारत वापस लाया गया है। यह आंकड़ा साल 2004 से 2013 के बीच की तुलना में 10 गुना ज्यादा है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

4 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत: 7 वर्षों में 36 देशों से 274 भगोड़े वापस लाए गए
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सात वर्षों में प्रत्यर्पण की दर में दस गुना वृद्धि

केंद्र सरकार ने हाल ही में जारी आंकड़ों में बताया है कि पिछले सात वर्षों के दौरान भारत ने 36 अलग-अलग देशों से कुल 274 भगोड़ों को वापस लाने में सफलता हासिल की है। यह उपलब्धि साल 2004 से 2013 के बीच के आंकड़ों की तुलना में लगभग दस गुना अधिक है। उस दौरान, हर साल औसतन केवल चार भगोड़ों को ही भारत लाया जा सका था। सरकार का कहना है कि इस कार्य को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में लिया गया है, जिसके चलते वांछित अपराधियों की वापसी की प्रक्रिया में तेजी आई है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत भगोड़े अपराधियों की 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति भी कुर्क की गई है। सरकार ने एक एकीकृत और तकनीक-आधारित खुफिया मॉडल तैयार किया है, जिससे न केवल अपराधियों की पहचान आसान हुई है, बल्कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को भी मजबूती मिली है।

विभिन्न अपराधों में वांछित अपराधियों का ब्यौरा

साल 2019 से जुलाई 2026 के बीच वापस लाए गए भगोड़ों में विभिन्न श्रेणियों के अपराधी शामिल हैं। इनमें 9 वित्तीय अपराधों से जुड़े लोग, 17 आतंकी मामलों के आरोपी, 42 संगठित अपराधों में लिप्त अपराधी, 62 हत्या और लूट जैसे हिंसक अपराधों के आरोपी, 53 यौन अपराधों (बच्चों के खिलाफ अपराध सहित) के आरोपी, 16 नशा तस्करी, 12 तस्करी और जाली मुद्रा, 18 मानव तस्करी और 45 अन्य अपराधों में वांछित व्यक्ति शामिल हैं।

इंटरपोल द्वारा जारी रेड कॉर्नर नोटिस की संख्या में भी भारी उछाल देखा गया है। पिछले तीन वर्षों में कुल 401 भगोड़ों के खिलाफ रेड नोटिस जारी किए गए हैं, जिसमें 2026 में अब तक 182 नोटिस जारी हो चुके हैं। यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सुरक्षा एजेंसियां अब अधिक सक्रिय और प्रभावी हो गई हैं।

रणनीतिक समन्वय और नई कानूनी व्यवस्था

गृह मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री के मार्गदर्शन में प्रत्यर्पण अनुरोधों को अब अधिक पेशेवर तरीके से तैयार किया जाता है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), CBI, R&AW, NIA, ED और विदेश मंत्रालय जैसी प्रमुख एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के लिए जनवरी 2026 में IB के मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) के तहत एक स्टैंडिंग फोकस ग्रुप का गठन किया गया है। यह समूह भगोड़ों के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का कार्य कर रहा है।

कानूनी मोर्चे पर भी सरकार ने बड़े बदलाव किए हैं। 2018 में भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम लागू करने के बाद, 2024 में लागू नए आपराधिक कानूनों में 'ट्रायल इन एब्सेंटिया' का प्रावधान किया गया है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 355 और 356 के तहत अब भगोड़े की अनुपस्थिति में भी उन पर मुकदमा चलाया जा सकता है, जिससे कानूनी प्रक्रिया में देरी की गुंजाइश कम हो गई है।

तकनीक का उपयोग और भविष्य की राह

CBI द्वारा जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया 'भारतपोल' (BHARATPOL) मंच 1,400 से अधिक एजेंसियों को एक साथ जोड़ता है, जिससे सूचनाओं का आदान-प्रदान त्वरित हो गया है। इसके अलावा, 'ऑपरेशन त्रिशूल' के माध्यम से सैटेलाइट इनपुट और डिजिटल फुटप्रिंट का उपयोग करके भगोड़ों की सटीक लोकेशन का पता लगाया जा रहा है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी आधुनिक सुविधाओं के उपयोग से अदालती सुनवाई में भी तेजी आई है, जिससे प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुगम हो गई है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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