लोकसभा स्पीकर की चाय पार्टी से इंडिया गठबंधन ने बनाई दूरी, राज्यसभा में शामिल हुए खड़गे और सोनिया
नई दिल्ली में गुरुवार, 13 अगस्त को लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद चाय पार्टी हुई। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की ओर से आयोजित इस पार्टी में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी शामिल नहीं हुईं।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

संसद के मानसून सत्र के समापन के बाद आयोजित पारंपरिक चाय पार्टी में राजनीतिक मतभेद साफ तौर पर नजर आए। गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद स्पीकर ओम बिरला द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन ने दूरी बनाए रखी। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के सांसदों ने इस आयोजन में हिस्सा नहीं लिया।
लोकसभा और राज्यसभा में अलग-अलग तस्वीर
संसद के दोनों सदनों में विपक्षी नेताओं का रुख अलग-अलग देखने को मिला। जहां लोकसभा स्पीकर की चाय पार्टी का इंडिया गठबंधन के प्रमुख दलों ने बहिष्कार किया, वहीं राज्यसभा में स्थिति भिन्न रही। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन द्वारा आयोजित चाय पार्टी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं ने शिरकत की।
लोकसभा स्पीकर के कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में सत्ता पक्ष की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मंत्रिमंडल के कई वरिष्ठ सदस्य मौजूद थे। परंपरा के अनुसार, सत्र के अंतिम दिन दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारी अपने-अपने कक्ष में चाय पार्टी का आयोजन करते हैं, जिसमें सभी दलों के सांसदों को आमंत्रित किया जाता है।
विपक्ष की अनुपस्थिति और कनिमोझी की मौजूदगी
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने पुष्टि की कि पार्टी के साथ-साथ समाजवादी पार्टी और टीएमसी के नेताओं ने स्पीकर की चाय पार्टी में शामिल न होने का निर्णय लिया था। हालांकि, इस बहिष्कार के बीच डीएमके सांसद कनिमोझी एक अपवाद रहीं, जो स्पीकर की चाय पार्टी में शामिल होने पहुंचीं। यह घटनाक्रम संसद के भीतर चल रहे राजनीतिक तनाव को दर्शाता है।
सत्र के अंतिम दिन लोकसभा की कार्यवाही काफी संक्षिप्त रही और महज एक मिनट में ही इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। वंदे मातरम के गायन के साथ सत्र का समापन हुआ। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और विपक्ष के नेता राहुल गांधी सदन में उपस्थित थे।
संसदीय परंपरा और वर्तमान राजनीतिक माहौल
संसद सत्र के समापन पर होने वाली चाय पार्टी को एक शिष्टाचार भेंट के रूप में देखा जाता है, जिसका उद्देश्य सत्र के दौरान हुई तल्खी को कम करना और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाना होता है। लेकिन इस बार विपक्ष द्वारा लोकसभा स्पीकर के कार्यक्रम से किनारा करना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
राज्यसभा में विपक्षी नेताओं की उपस्थिति यह संकेत देती है कि उच्च सदन में संवाद के रास्ते अभी भी खुले हैं। वहीं, लोकसभा में बहिष्कार की रणनीति ने सरकार और विपक्ष के बीच के गहरे मतभेदों को एक बार फिर सार्वजनिक कर दिया है। फिलहाल इस मामले पर किसी भी दल की ओर से कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
संसद का यह मानसून सत्र कई महत्वपूर्ण चर्चाओं और हंगामे के बीच संपन्न हुआ। सत्र के अंतिम दिन की यह घटना आने वाले समय में संसदीय कार्यप्रणाली और सत्ता-विपक्ष के संबंधों पर क्या असर डालेगी, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, संसद का कामकाज अनिश्चितकाल के लिए बंद हो गया है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!