हिसार रेप केस: छात्रा को अगवा कर दुष्कर्म करने में मदद करने वाले आरोपी को 3 साल की कैद
हिसार में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनील जिंदल की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने आठवीं कक्षा की छात्रा से रेप के मामले में दोषी अमित के नाबालिग सहयोगी को दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी पर 15 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

हिसार फास्ट ट्रैक कोर्ट का बड़ा फैसला
हिसार की एक फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने आठवीं कक्षा की छात्रा के साथ हुए दुष्कर्म मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनील जिंदल की अदालत ने मुख्य आरोपी अमित के सहयोगी को दोषी करार देते हुए तीन साल की कैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
यह मामला साल 2021 का है, जब एक नाबालिग छात्रा को बहला-फुसलाकर अगवा किया गया था। इस मामले के मुख्य आरोपी अमित को पहले ही फरवरी 2026 में 20 साल की कठोर सजा सुनाई जा चुकी है। अब उसके सहयोगी को सजा मिलने से पीड़िता को न्याय की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ने का अवसर मिला है।
क्या था पूरा मामला और कैसे दिया वारदात को अंजाम
पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया था कि 27 अगस्त 2021 को मुख्य आरोपी अमित और उसका सहयोगी उसे घर के पीछे वाली गली में मिलने के लिए बुलाकर ले गए। वहां से दोनों उसे मोटरसाइकिल पर बैठाकर बस स्टैंड के पास एक कमरे में ले गए। उस समय वहां आरोपी का पिता भी मौजूद था, जिसने उन्हें वहां से जाने के लिए कहा था।
इसके बाद आरोपी उसे बस स्टैंड ले गए, जहां से उसका सहयोगी वहां से चला गया। मुख्य आरोपी अमित पीड़िता को बस के जरिए लुधियाना ले गया और वहां अपने एक परिचित के घर पर रखा। इसके बाद वह उसे अमृतसर और हरिद्वार ले गया, जहां अलग-अलग होटलों में उसके साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया।
कानूनी कार्रवाई और धाराओं का विवरण
इस मामले में पुलिस ने साल 2022 में शिकायत दर्ज की थी। जांच के दौरान पुलिस ने पॉक्सो एक्ट और भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। अदालत ने बुधवार को सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी को धारा 363, 366 और 120बी के तहत दोषी पाया।
अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर यह सजा तय की है। आरोपी को लुधियाना से गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद से ही यह कानूनी प्रक्रिया चल रही थी। अदालत के इस फैसले को पीड़िता के प्रति हुए अपराध के मामले में एक अहम कड़ी माना जा रहा है।
न्याय प्रक्रिया का महत्व
इस मामले में मुख्य आरोपी के साथ-साथ उसके सहयोगी को सजा मिलना यह दर्शाता है कि अपराध में शामिल हर व्यक्ति को कानून के दायरे में लाया जाएगा। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए समयबद्ध तरीके से सुनवाई पूरी की है, जिससे पीड़ित परिवार को राहत मिली है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसलों से समाज में कड़ा संदेश जाता है। नाबालिगों के खिलाफ होने वाले अपराधों में अदालतें अब अधिक सख्त रुख अपना रही हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!