संविदा शिक्षकों के नियमितीकरण पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने संविदा पर कार्यरत शिक्षकों के नियमितीकरण के मुद्दे पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। न्यायालय ने पूछा है कि 15 साल या उससे अधिक समय से संविदा पर काम कर रहे शिक्षकों के नियमितीकरण के लिए कोई नीति या योजना बनाई गई है या नहीं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने संविदा पर कार्यरत शिक्षकों के भविष्य और उनके नियमितीकरण को लेकर राज्य सरकार से कड़ा रुख अपनाते हुए जवाब तलब किया है। न्यायालय ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या 15 साल या उससे अधिक समय से संविदा के आधार पर सेवाएं दे रहे शिक्षकों के लिए कोई ठोस नीति या नियमितीकरण की योजना तैयार की गई है या नहीं।
क्या है पूरा मामला?
यह निर्देश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने अमेठी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की एक शिक्षिका अर्चना बूध द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। शिक्षिका ने अपनी संविदा का नवीनीकरण न किए जाने के विभागीय आदेश को चुनौती दी थी। कोर्ट ने 16 जून 2026 को जारी उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके तहत शिक्षिका को सेवा से हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। न्यायालय ने उन्हें फिलहाल अपनी सेवाएं जारी रखने की अनुमति प्रदान की है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सक्षम अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि अर्चना बूध 16 जनवरी 2010 से लगातार विद्यालय में संविदा शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं। पिछले 16 वर्षों से उनकी संविदा का नियमित रूप से नवीनीकरण किया जा रहा था, लेकिन जून 2026 में विभाग ने अचानक इसे आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि शिक्षिका की आयु अब 39 वर्ष हो चुकी है, जिसके कारण वह किसी अन्य संस्थान में नई भर्ती के लिए आवेदन करने की पात्रता खो चुकी हैं।
शिक्षकों के सम्मान और भविष्य पर चिंता
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि राष्ट्र निर्माता कहे जाने वाले शिक्षकों के साथ इस तरह का व्यवहार किया जा रहा है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि 16 साल की लंबी सेवा के बाद किसी शिक्षक को बिना किसी ठोस कारण या व्यक्तिगत आरोप के अचानक सेवा से हटा देना उचित नहीं है। न्यायालय ने माना कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन हजारों शिक्षकों की पीड़ा को दर्शाता है जो लंबे समय से संविदा पर काम कर रहे हैं।
न्यायालय ने राज्य सरकार से यह भी पूछा है कि इतने वर्षों तक सेवा देने वाले इन शिक्षकों के लिए भविष्य में क्या सुरक्षात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार को यह बताना होगा कि क्या उनके पास इन अनुभवी शिक्षकों को नियमित करने के लिए कोई नीतिगत ढांचा मौजूद है।
अगली सुनवाई की दिशा
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया है। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 8 सितंबर को निर्धारित की गई है। इस सुनवाई में सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले जवाब पर ही हजारों संविदा शिक्षकों का भविष्य निर्भर करेगा। यदि सरकार कोई सकारात्मक नीति पेश करती है, तो इससे लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकती है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह रुख संविदा कर्मियों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा लंबे समय से लंबित है, और अब न्यायालय के हस्तक्षेप से इस पर नीतिगत निर्णय लेने का दबाव सरकार पर बढ़ गया है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!