गुरुग्राम में हाईकोर्ट सर्किट बेंच की मांग: राज्यसभा में गूंजी दक्षिण हरियाणा के लोगों की आवाज
Rajya Sabha MP Sanjay Bhatia seeks High Court Circuit Bench in Gurugram for South Haryana. हरियाणा से राज्यसभा सदस्य संजय भाटिया ने शून्यकाल के दौरान गुरुग्राम में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की सर्किट बेंच स्थापित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि यह एक्सेस टू जस्टिस, ज्यूडिशियल डिसेंट्रालाइजेशन और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से जुड़ा राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

राज्यसभा में उठी गुरुग्राम में हाईकोर्ट बेंच की मांग
हरियाणा से राज्यसभा सांसद संजय भाटिया ने शून्यकाल के दौरान गुरुग्राम में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की सर्किट बेंच स्थापित करने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया है। सांसद ने तर्क दिया कि दक्षिण हरियाणा के निवासियों के लिए चंडीगढ़ स्थित हाईकोर्ट तक पहुंचना न केवल खर्चीला है, बल्कि इसमें काफी समय भी बर्बाद होता है। उन्होंने इसे न्याय सुलभ बनाने और न्यायिक विकेंद्रीकरण की दिशा में एक आवश्यक कदम बताया।
सांसद भाटिया ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह, पलवल, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जैसे जिलों के लाखों लोगों, वकीलों और उद्यमियों को अपने कानूनी कार्यों के लिए चंडीगढ़ की लंबी यात्रा करनी पड़ती है। इससे न केवल मुकदमेबाजी की लागत बढ़ती है, बल्कि समयबद्ध न्याय मिलने में भी बड़ी बाधा उत्पन्न होती है। उन्होंने इस मांग को 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और राष्ट्रीय महत्व का विषय करार दिया।
औद्योगिक और कॉर्पोरेट हब के रूप में गुरुग्राम की भूमिका
संजय भाटिया ने सदन को अवगत कराया कि गुरुग्राम आज देश का प्रमुख आईटी और कॉर्पोरेट हब बन चुका है। यहां स्टार्टअप्स, वित्तीय संस्थानों और बड़े उद्योगों की भरमार है, जिसके कारण वाणिज्यिक विवाद, श्रम कानून से जुड़े मामले, कर संबंधी विवाद और दिवालियापन जैसे कानूनी मामले भी बड़ी संख्या में उत्पन्न होते हैं। ऐसे में एक स्थानीय सर्किट बेंच का होना न केवल व्यापारिक सुगमता बढ़ाएगा, बल्कि निवेशकों का भरोसा भी मजबूत करेगा।
सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि गुरुग्राम में हाल ही में अत्याधुनिक 'टॉवर ऑफ जस्टिस' का निर्माण किया गया है। इस परिसर में डिजिटल कोर्टरूम और ई-कोर्ट जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, जो हाईकोर्ट की सर्किट बेंच के संचालन के लिए एक आदर्श आधार प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा बुनियादी ढांचे का उपयोग करके बिना किसी अतिरिक्त देरी के न्यायिक सेवाओं को स्थानीय स्तर पर सुदृढ़ किया जा सकता है।
संवैधानिक दायित्व और न्याय का विकेंद्रीकरण
अपनी बात रखते हुए सांसद ने संविधान के अनुच्छेद 39A का हवाला दिया, जो राज्य को प्रत्येक नागरिक के लिए समान न्याय सुनिश्चित करने का निर्देश देता है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित न्याय पाना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। न्यायिक विकेंद्रीकरण केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि नागरिकों के प्रति राज्य का एक संवैधानिक दायित्व है, जिसे पूरा करना समय की मांग है।
सांसद ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वे राज्य सरकार और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट प्रशासन के साथ मिलकर इस दिशा में तुरंत कदम उठाएं। उन्होंने मांग की कि गुरुग्राम में सर्किट बेंच की स्थापना की संभावनाओं को तलाशने के लिए एक विस्तृत फिजिबिलिटी स्टडी (संभाव्यता अध्ययन) जल्द से जल्द शुरू की जानी चाहिए।
भविष्य की संभावनाएं और प्रभाव
यदि गुरुग्राम में हाईकोर्ट की सर्किट बेंच स्थापित होती है, तो इससे न केवल लंबित मामलों के बोझ में कमी आएगी, बल्कि दक्षिण हरियाणा के निवासियों को न्याय के लिए चंडीगढ़ के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। यह कदम क्षेत्र में कानून के शासन को और अधिक प्रभावी बनाएगा और न्यायिक प्रक्रियाओं को आम जनता के करीब लाएगा।
सांसद संजय भाटिया की इस मांग ने एक बार फिर हरियाणा के न्यायिक ढांचे में सुधार की बहस को तेज कर दिया है। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार और संबंधित न्यायिक अधिकारी इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाते हैं और कब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई शुरू की जाती है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
