हरियाणा रोडवेज का बड़ा ऐलान: 5 और 6 सितंबर को प्रदेशभर में रहेगा चक्का जाम
सिरसा डिपो प्रधान पृथ्वी सिंह ने मीडिया को दिए बयान में बताया, 5 और 6 सितंबर को हरियाणा में राज्यव्यापी हड़ताल की जाएगी और चक्का जाम रहेगा। उसी के संदर्भ में इस पैदल मार्च व धरना प्रदर्शन के लिए सरकार तक आवाज पहुंचाई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

सिरसा में रोडवेज कर्मचारियों का शक्ति प्रदर्शन
हरियाणा रोडवेज के कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सिरसा डिपो की रोडवेज यूनियनों ने आगामी 5 और 6 सितंबर को राज्यव्यापी हड़ताल और चक्का जाम करने का ऐलान किया है। इस प्रस्तावित हड़ताल के समर्थन में बुधवार को सिरसा बस स्टैंड पर कर्मचारियों ने दो घंटे का सांकेतिक धरना दिया और सरकार विरोधी नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने पैदल मार्च निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया और विभाग के महाप्रबंधक (जीएम) को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
सिरसा डिपो के प्रधान पृथ्वी सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि यह हड़ताल सरकार को जगाने के लिए की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि परिवहन विभाग और सरकार ने समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो 5 और 6 सितंबर को पूरे हरियाणा में बसों का संचालन पूरी तरह ठप रहेगा। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में चालक और परिचालक शामिल हुए, जिसके चलते बस स्टैंड पर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई थी।
प्रमुख मांगें और यूनियनों का रुख
रोडवेज यूनियनों ने सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। इनमें चालक और परिचालकों का पे-ग्रेड बढ़ाना, परिचालकों को तीन अतिरिक्त वेतन वृद्धि देना और जोखिम भत्ता लागू करना शामिल है। इसके अलावा, कर्मचारी पिछले 10 वर्षों से लंबित बोनस का भुगतान करने, अर्जित अवकाश की पुरानी व्यवस्था को बहाल करने और विभाग में रिक्त पदों पर पक्की भर्ती करने की मांग कर रहे हैं। यूनियनों का यह भी कहना है कि नई इलेक्ट्रिक बसों को निजी हाथों के बजाय सीधे परिवहन विभाग के अधीन संचालित किया जाना चाहिए।
यूनियन सचिव सुरेंद्र सिंह ने बताया कि 22 अगस्त को सिरसा के चौपटा में आयोजित महासम्मेलन में राज्य की 15 यूनियनों ने एक मंच पर आने का निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल एक डिपो की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के रोडवेज कर्मचारियों के हितों की है। वर्कशॉप में कर्मचारियों की भर्ती और लंबित प्रमोशन को लेकर भी यूनियनों ने सरकार पर दबाव बनाया है।
लंबे समय से जारी है संघर्ष
रोडवेज कर्मचारियों का यह आंदोलन अचानक शुरू नहीं हुआ है। इससे पहले 25 जुलाई को सांझा मोर्चा ने अंबाला में परिवहन मंत्री अनिल विज के आवास का घेराव किया था। उस समय मंत्री ने यूनियन पदाधिकारियों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया था और मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। हालांकि, आश्वासन के बाद भी ठोस परिणाम न मिलने पर कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है।
यूनियन नेताओं ने सरकार को 3 सितंबर तक का समय दिया था, लेकिन अब तक कोई समाधान न निकलने के कारण उन्होंने 5 और 6 सितंबर को चक्का जाम का अंतिम निर्णय लिया है। कर्मचारियों का कहना है कि वे आम जनता को होने वाली असुविधा के लिए खेद जताते हैं, लेकिन अपनी वाजिब मांगों को मनवाने के लिए उनके पास हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
आगे की स्थिति
आने वाले दिनों में यदि सरकार और रोडवेज यूनियनों के बीच कोई समझौता नहीं होता है, तो हरियाणा में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि रोडवेज बसें राज्य के लाखों लोगों की जीवन रेखा हैं। फिलहाल, प्रशासन और विभाग के अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, जबकि कर्मचारी अपनी मांगों पर अडिग हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!