हरियाणा: मंत्री रणबीर गंगवा बनकर अफसरों को धमकाने वाला गिरोह राजस्थान से गिरफ्तार
Fake calls to Haryana officials and BJP leaders using Minister Ranbir Gangwa name, arrest. Haryana mein PWD mantri Ranbir Gangwa ke naam ka farzi istemal kar adhikariyon aur bhajpa padadhikariyon ko jhanse mein lene ki koshish karne wale do cyber thagon ko police ne giraftar kar liya hai. Cyber thana police aur CIA ki sanyukt team ne Rajasthan ke Alwar jile ke Nadka gaon mein dabish dekar dono sandigdhon ko dabocha hai.

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मंत्री के नाम का दुरुपयोग कर अधिकारियों को बनाया जा रहा था निशाना
हरियाणा के पीडब्ल्यूडी एवं जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा के नाम का सहारा लेकर अधिकारियों और भाजपा पदाधिकारियों को झांसे में लेने का मामला सामने आया है। हिसार पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल साइबर धोखाधड़ी का पर्दाफाश करते हुए राजस्थान के अलवर जिले से दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। आरोपी मंत्री के नाम से फर्जी सिम कार्ड चला रहे थे और खुद को मंत्री बताकर सरकारी अधिकारियों पर दबाव बना रहे थे।
जांच में सामने आया है कि ठगों ने बेहद शातिराना तरीके से इस जाल को बुना था। उन्होंने मंत्री के नाम पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिम कार्ड हासिल किया था। इस सिम को इस तरह कॉन्फ़िगर किया गया था कि ट्रू-कॉलर पर कॉल करने वाले का नाम खुद-ब-खुद 'रणबीर गंगवा' दिखाई देता था। इतना ही नहीं, लोगों का भरोसा जीतने के लिए उन्होंने मंत्री के आधिकारिक फेसबुक पेज से हालिया कार्यक्रम की तस्वीरें डाउनलोड कर अपनी व्हाट्सएप डीपी पर लगा रखी थीं।
भाजपा जिलाध्यक्षों की सतर्कता से खुला फर्जीवाड़ा
आरोपियों ने अंबाला के जनस्वास्थ्य विभाग के अधीक्षण अभियंता और गुरुग्राम के एक अधिकारी को फोन कर अपना आदमी बताकर काम करने का दबाव बनाया था। इसके बाद उन्होंने पानीपत और करनाल के भाजपा जिलाध्यक्षों को भी फोन किए। हालांकि, जिलाध्यक्षों ने जब कॉल करने वाले के बोलने के लहजे और शैली में अंतर महसूस किया, तो उन्हें संदेह हुआ। करनाल के जिलाध्यक्ष ने तुरंत मंत्री के निजी नंबर पर संपर्क कर सच्चाई का पता लगाया, जिसके बाद पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
मंत्री रणबीर गंगवा ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि उन्हें करनाल और पानीपत के जिलाध्यक्षों से इस बारे में जानकारी मिली थी। उन्होंने कहा कि उनके नाम का गलत इस्तेमाल कर लोगों को गुमराह किया जा रहा था, जिसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस को शिकायत दी। फिलहाल, किसी भी व्यक्ति से पैसे ठगे जाने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन आरोपियों के इरादे स्पष्ट रूप से सरकारी कामकाज में अनुचित हस्तक्षेप करने के थे।
पुलिस की संयुक्त टीम ने अलवर में की दबिश
मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्री के निजी सहायक अरुण कुमार ने साइबर थाना पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर हिसार पुलिस की साइबर सेल और सीआईए की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और लोकेशन के आधार पर राजस्थान के अलवर जिले के नाडका गांव में दबिश दी और दोनों आरोपियों को धर दबोचा।
हिसार के पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह के तार और कहां तक जुड़े हैं और क्या इन्होंने पहले भी किसी अन्य अधिकारी को इस तरह के फोन किए थे। फिलहाल, दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
यह घटना साइबर सुरक्षा के प्रति एक बड़ी चेतावनी है, जहां तकनीक का इस्तेमाल कर किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति का नाम और पहचान चुराई जा सकती है। पुलिस ने अधिकारियों और आम जनता से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें और किसी भी प्रकार के अनुचित दबाव में न आएं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
