गुरुग्राम: हुक्का विवाद में युवक की हत्या मामले में दो पुलिसकर्मी सस्पेंड, पंचायत में विधायक ने लगाई थी फटकार
गुरुग्राम में गांव कारौला के युवक सागर की हत्या के मामले में फर्रुखनगर क्राइम ब्रांच ने नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो गाड़ी भी बरामद की है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

लापरवाही पर गिरी गाज: दो पुलिसकर्मी निलंबित
हरियाणा के गुरुग्राम में होमगार्ड के बेटे सागर की निर्मम हत्या के मामले में पुलिस प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने के आरोप में दो पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। फर्रुखनगर थाना एसएचओ महेंद्र सिंह ने पुष्टि की है कि हेडकांस्टेबल अशोक और विनोद को सस्पेंड कर दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है।
यह घटना 6 अगस्त की है, जब बेंगलुरु से काम करके लौटे 22 वर्षीय सागर की कुछ लोगों ने घर में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड के पीछे हुक्का भरने को लेकर हुआ एक पुराना विवाद बताया जा रहा है। घटना के बाद से ही इलाके में भारी तनाव व्याप्त था और ग्रामीणों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे।
हुक्का विवाद से शुरू हुई रंजिश
मामले की जड़ 3 अगस्त को हुई एक कहासुनी में है। मृतक सागर के पिता मुन्नी लाल ने आरोप लगाया था कि गांव के सचेत उर्फ मुन्ना और उसके साथियों ने हुक्का भरने को लेकर उनके दूसरे बेटे शंकर के साथ मारपीट की थी। उस समय भी पुलिस से शिकायत की गई थी, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया, जिससे आरोपियों के हौसले बुलंद हो गए।
पिता और भाई पर हुए हमले की जानकारी मिलने पर सागर बेंगलुरु से घर लौटा था। 6 अगस्त को जब वह अपने भाई के साथ घर जा रहा था, तभी करीब 20-25 लोगों ने उनका पीछा किया। दोनों भाई जान बचाकर घर के अंदर भागे, लेकिन हमलावर हथियार और लाठियों से लैस होकर घर में घुस गए और सागर को गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
पंचायत में विधायक की नाराजगी और पुलिस की कार्रवाई
हत्या के बाद आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया था और पटौदी-कुलाना रोड पर जाम लगा दिया था। 8 अगस्त को आयोजित पंचायत में पटौदी की भाजपा विधायक बिमला देवी ने एसएचओ महेंद्र सिंह को सबके सामने जमकर फटकार लगाई। उन्होंने सवाल किया कि समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई, जबकि पीड़ित परिवार ने पहले ही पुलिस को सूचना दी थी।
विधायक की नाराजगी और ग्रामीणों के भारी दबाव के बाद पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और वारदात में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो गाड़ी भी बरामद कर ली है। आरोपियों की गिरफ्तारी का वीडियो परिजनों को दिखाए जाने के बाद ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।
आगे की जांच और स्थिति
पुलिस ने अब इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश भी तेज कर दी है। निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों के खिलाफ इंटरनल जांच यह पता लगाने के लिए की जा रही है कि क्या उन्होंने जानबूझकर आरोपियों को संरक्षण दिया या शिकायत को नजरअंदाज किया। फिलहाल गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात है।
यह मामला पुलिस की जवाबदेही पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। परिजनों का आरोप है कि यदि पुलिस ने 3 अगस्त की घटना के बाद ही सख्त कदम उठाए होते, तो आज सागर जीवित होता। अब देखना यह है कि विभागीय जांच में दोषी पाए जाने पर इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या कठोर कदम उठाए जाते हैं।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!