गुरुग्राम: फर्जी बैंक खातों के जरिए साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, दो गिरफ्तार
Gurugram cyber crime police busted interstate gang providing fake bank accounts. गुरुग्राम में साइबर क्राइम पुलिस ने साइबर अपराधियों को फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के दो सक्रिय सदस्यों को सेक्टर-65 इलाके से गिरफ्तार किया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

साइबर अपराधियों को बैंक खाते मुहैया कराने वाला गिरोह पकड़ा गया
गुरुग्राम पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर अपराधी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो देश भर के साइबर ठगों को फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम करता था। सेक्टर-65 इलाके से पुलिस ने इस गिरोह के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान 39 वर्षीय अजय कावटिया और 22 वर्षीय रजत ग्रोवर के रूप में हुई है। पुलिस की इस कार्रवाई से साइबर अपराध की दुनिया में सक्रिय एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
एसीपी साइबर क्राइम गौरव फोगाट ने बताया कि पुलिस को लंबे समय से इस गिरोह के बारे में सूचना मिल रही थी। छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से भारी मात्रा में बैंकिंग उपकरण बरामद किए हैं। इनमें 88 चेक बुक, 88 एटीएम कार्ड, 11 डिजिटल सिग्नेचर (DSC), 08 मोबाइल फोन, 07 रबर स्टैंप और 14 बैंक स्कैनर शामिल हैं। यह बरामदगी साबित करती है कि आरोपी बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहे थे।
फर्जी कंपनियों के नाम पर खोला गया खातों का जाल
पूछताछ में सामने आया है कि इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड अजय कावटिया है। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर चार फर्जी कंपनियां बनाईं और उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर बैंकों में लगभग 80 करंट और सेविंग खाते खुलवाए। इन खातों को वह देश-विदेश में बैठे साइबर अपराधियों को किराए पर या सीधे बेच देता था। रजत ग्रोवर ने भी लालच में आकर अपने नाम पर खाता खुलवाया और उसे अजय को सौंप दिया, जिसका इस्तेमाल ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था।
आरोपियों के काम करने का तरीका बेहद संगठित था। अजय कावटिया को साइबर ठगों से लूटी गई कुल राशि का 6 प्रतिशत कमीशन मिलता था। इस मोटी कमाई में से वह कुछ हिस्सा उन लोगों को देता था जो पैसों के लालच में अपने दस्तावेज और बैंक खाते उसे उपलब्ध कराते थे। इस तरह यह गिरोह एक चेन की तरह काम कर रहा था, जिससे साइबर ठगों को अपनी पहचान छुपाने में मदद मिलती थी।
250 से अधिक मामलों में खातों का कनेक्शन
पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इन फर्जी खातों के खिलाफ देश भर के विभिन्न थानों में साइबर अपराध की 250 से अधिक शिकायतें पहले से ही दर्ज हैं। इन खातों के जरिए करोड़ों रुपये का अवैध लेनदेन होने की आशंका है। पुलिस अब इन सभी शिकायतों का विवरण खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह ने अब तक कुल कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया है।
वर्तमान में आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं। पुलिस उनसे पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों और इस पूरे फर्जीवाड़े में बैंक अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं क्योंकि नेटवर्क काफी बड़ा है और कई अन्य लोगों के शामिल होने के सबूत मिल रहे हैं।
साइबर सुरक्षा को लेकर पुलिस की सख्ती
गुरुग्राम पुलिस ने आम जनता को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। पुलिस का कहना है कि लोग पैसों के लालच में आकर अपने बैंक खाते या दस्तावेज किसी अनजान व्यक्ति को न दें। किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत साइबर क्राइम सेल को सूचित करें। पुलिस कमिश्नरेट इस तरह के साइबर अपराधों को रोकने के लिए लगातार निगरानी बढ़ा रही है और इस मामले में शामिल हर कड़ी को तोड़ने का प्रयास कर रही है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
