गुरुग्राम में 200 करोड़ का जीएसटी घोटाला: ऑटो सर्विस स्टार्टअप के दो संस्थापक और दो सीए गिरफ्तार
Gurugram Rs 200 Crore ITC Tax Fraud Case, Auto Service Company Founders Arrested. गुरुग्राम में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) की एंटी-इवेजन विंग ने एक बड़े कॉर्पोरेट फ्रॉड का भंडाफोड़ किया है। विभाग ने बेहद शातिर तरीके से अंजाम दिए जा रहे ₹200 करोड़ के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले को उजागर किया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

गुरुग्राम में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) विभाग की एंटी-इवेजन विंग ने एक बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। इस मामले में ₹200 करोड़ के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। जांच एजेंसियों ने इस सुनियोजित धोखाधड़ी में शामिल एक ऑटो सर्विस स्टार्टअप के दो पूर्व को-फाउंडर्स और दो चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CA) को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तारी के बाद सभी चार आरोपियों को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चारों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। पकड़े गए आरोपियों की उम्र 30 से 35 वर्ष के बीच बताई जा रही है और ये सभी उच्च शिक्षित हैं।
शेल कंपनियों के जरिए बुना गया जाल
जांच में सामने आया है कि करीब चार साल पहले शुरू किए गए इस स्टार्टअप को शुरुआती दौर में घाटा हुआ था। इस नुकसान की भरपाई करने और बाजार से भारी निवेश हासिल करने के लिए आरोपियों ने शेल कंपनियों का एक जटिल नेटवर्क तैयार किया। इस सिंडिकेट ने बिना किसी वास्तविक माल या सेवा की आपूर्ति के केवल कागजों पर फर्जी बिल जारी किए।
आरोपियों ने 'सर्कुलर ट्रेडिंग' तकनीक का सहारा लिया, जिसमें बिलों और पैसों को आपस में घुमाकर फर्जी टर्नओवर दिखाया गया। इसी कागजी कारोबार के आधार पर सरकार से ₹200 करोड़ का आईटीसी क्लेम किया गया। इस पूरी प्रक्रिया को वैध दिखाने में दोनों चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने अपनी विशेषज्ञता का गलत इस्तेमाल किया।
एआई और डेटा एनालिटिक्स से खुली पोल
यह घोटाला जीएसटी विभाग के आधुनिक एआई-आधारित 'बिजनेस इंटेलिजेंस एंड फ्रॉड एनालिटिक्स' सिस्टम की मदद से पकड़ा गया। सिस्टम ने पाया कि जिन कंपनियों के बीच करोड़ों का व्यापार दिखाया जा रहा था, उनके बीच माल की कोई वास्तविक आवाजाही नहीं हो रही थी। ई-वे बिल और टोल डेटा का मिलान करने पर विसंगतियां सामने आईं, जिसके बाद विभाग ने छापेमारी की।
छापेमारी के दौरान टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, लैपटॉप, फोन और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह मामला केंद्रीय माल एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की सख्त धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। चूंकि धोखाधड़ी की राशि ₹5 करोड़ से अधिक है, इसलिए यह एक गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
आगे की कार्रवाई और कानूनी परिणाम
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, आरोपियों पर टैक्स चोरी की गई राशि का 100% जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा, दोष सिद्ध होने पर उन्हें 5 वर्ष तक की सश्रम कारावास की सजा हो सकती है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है।
आने वाले दिनों में इस रैकेट से जुड़ी अन्य संदिग्ध कंपनियों और इसमें शामिल अन्य बड़े नामों का खुलासा होने की संभावना है। विभाग अब इस नेटवर्क के जरिए हुए अन्य वित्तीय लेन-देन की गहन जांच कर रहा है ताकि इस पूरे सिंडिकेट को जड़ से खत्म किया जा सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
