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14.5 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोपी नीलेश पटेल बैतूल से गिरफ्तार, शेल कंपनियों के जरिए चला रहा था बड़ा नेटवर्क

गुजरात और महाराष्ट्र में करीब 14.5 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के सात मामलों में फरार चल रहे आरोपी नीलेश धीरूभाई पटेल को अहमदाबाद की वासणा पुलिस ने मध्यप्रदेश के बैतूल से गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, नीलेश पर फर्जी प्रॉपर्टी लोन, शेल कंपनियों और निवेश के नाम पर करीब 14.5 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप है।

मोहम्मद नवेद

मोहम्मद नवेद

एडिटर

6 सितंबर 20262 मिनट पढ़ें
14.5 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोपी नीलेश पटेल बैतूल से गिरफ्तार, शेल कंपनियों के जरिए चला रहा था बड़ा नेटवर्क
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सात साल से फरार था आरोपी, बैतूल में बदल लिया था हुलिया

गुजरात और महाराष्ट्र में करीब 14.5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामलों में वांछित नीलेश धीरूभाई पटेल को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अहमदाबाद की वासणा पुलिस ने एक लंबे ऑपरेशन के बाद उसे मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से दबोचा। नीलेश पिछले सात वर्षों से पुलिस को चकमा दे रहा था और अपनी पहचान छिपाने के लिए उसने अपना हुलिया भी पूरी तरह बदल लिया था। गिरफ्तारी के दौरान उसके साथ उसका सहयोगी दीपक आहूजा उर्फ दीपू टैंक भी पकड़ा गया है।

पुलिस के अनुसार, नीलेश खुद को एक बड़े शेयर मार्केट एडवाइजर के रूप में पेश करता था और लग्जरी कारों व महंगे गैजेट्स का इस्तेमाल कर लोगों को अपने रसूख का झांसा देता था। 'ऑपरेशन हॉक आई' के तहत 10 महीने की कड़ी निगरानी और तकनीकी सर्विलांस के बाद पुलिस उस तक पहुंचने में सफल रही। इस कार्रवाई में पुलिस ने आरोपियों के पास से लैपटॉप, मोबाइल और कार सहित करीब 35 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की है।

शेल कंपनियों और हांगकांग तक फैला था जाल

पूछताछ में सामने आया है कि नीलेश ने मुंबई में 'टोशन ग्रुप' के नाम से लगभग 20 शेल कंपनियां बनाई थीं। उसने 'टोशन इंटरनेशनल' नाम की एक कंपनी को हांगकांग में भी पंजीकृत कराया था, जिसके जरिए वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धोखाधड़ी का जाल बिछा रहा था। पुलिस ने उसके नेटवर्क से जुड़े 65 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है, जिनमें करीब 20 लाख रुपये की राशि जमा पाई गई है।

आरोपी ने निवेश के नाम पर लोगों को ठगने के लिए सेमीकंडक्टर प्लांट और 'सेमी कॉइन' नामक क्रिप्टोकरेंसी का सहारा लिया था। उसने उत्तर प्रदेश में जमीन खरीदने का दावा कर निवेशकों से करोड़ों रुपये जुटाए थे। इसके अलावा, उसने फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके संपत्ति के मालिकों की जानकारी के बिना उन पर लाखों रुपये के लोन भी लिए थे।

बैंक अधिकारियों और वैल्यूअर्स की मिलीभगत की जांच

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि नीलेश का यह सिंडिकेट बैंक अधिकारियों और प्रॉपर्टी वैल्यूअर्स के साथ मिलकर काम करता था। ये लोग ऐसी संपत्तियों की पहचान करते थे जो विवादित होती थीं या जिनके कागजात फर्जी बनाए जा सकते थे। बैंक से लोन लेने के बाद आरोपी शुरुआत में कुछ किस्तें चुकाते थे ताकि शक न हो, और फिर अचानक गायब हो जाते थे। इस मामले में पहले ही एक बैंक मैनेजर की गिरफ्तारी हो चुकी है।

अहमदाबाद पुलिस अब उन सभी बैंक अधिकारियों और वैल्युअर्स की भूमिका की गहन जांच कर रही है जो इस धोखाधड़ी में शामिल हो सकते हैं। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सात साल की फरारी के दौरान नीलेश किन-किन स्थानों पर रहा और उसे किन लोगों ने शरण दी थी। इस गिरफ्तारी को पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है क्योंकि आरोपी का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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