जबलपुर हाईकोर्ट से पूर्व आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा को बड़ी राहत, 18 महीने बाद मिली सशर्त जमानत
पूर्व आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा को आखिरकार मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 18 माह बाद जमानत का लाभ दिया है। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने उसकी नियमित जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उसे सशर्त रिहा करने के आदेश दिए हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

18 महीने बाद जेल से बाहर आएंगे सौरभ शर्मा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को बड़ी राहत देते हुए जमानत प्रदान कर दी है। सौरभ शर्मा फरवरी 2025 से न्यायिक हिरासत में बंद थे। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने उनकी नियमित जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए उन्हें सशर्त रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने आरोपी को 10 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत राशि जमा करने का निर्देश दिया है।
सौरभ शर्मा पर भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोप हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए इससे पहले उनकी जमानत याचिकाएं दो बार खारिज हो चुकी थीं। आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था, जहां से उन्हें कानून के अनुसार निचली अदालतों में पुनः आवेदन करने की छूट मिली थी। इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी की बीमारी का हवाला देते हुए फिर से याचिका दायर की थी।
क्या था पूरा मामला और बरामदगी
यह मामला तब सुर्खियों में आया था जब भोपाल के बाहरी इलाके में स्थित मेंडोरी के जंगल में एक इनोवा कार से 52 किलो सोना और करीब 11 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे। आयकर विभाग और लोकायुक्त पुलिस की छापेमारी के दौरान यह बड़ी संपत्ति जब्त की गई थी। आरोप है कि यह कार सौरभ शर्मा से जुड़ी थी, जिसके बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।
सुनवाई के दौरान ईडी ने जमानत का कड़ा विरोध किया था। जांच एजेंसी का तर्क था कि आरोपी प्रभावशाली है और बाहर आने पर सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है या गवाहों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, बचाव पक्ष ने लंबी अवधि तक जेल में रहने और जांच पूरी होने का तर्क दिया।
हाईकोर्ट की कड़ी शर्तें और आगे की प्रक्रिया
हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए स्पष्ट किया है कि यह राहत आरोपों से मुक्ति नहीं है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, इसलिए आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना उचित नहीं है। साथ ही, मामले में गवाहों और दस्तावेजों की संख्या अधिक होने के कारण ट्रायल में लंबा समय लगने की संभावना है।
अदालत ने सौरभ शर्मा के लिए कई शर्तें तय की हैं। उन्हें ट्रायल कोर्ट की प्रत्येक सुनवाई में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहना होगा। इसके अलावा, उन्हें बिना अनुमति के देश छोड़ने की मनाही है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि आरोपी किसी भी गवाह को प्रभावित करने या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने का प्रयास करता है, तो उसकी जमानत रद्द कर दी जाएगी।
वर्तमान में मामला ट्रायल कोर्ट में साक्ष्य और सुनवाई के चरण में है। सौरभ शर्मा पर लगे आरोपों में अधिकतम सात साल की सजा का प्रावधान है। कोर्ट ने इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही उन्हें सशर्त रिहाई का लाभ दिया है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!