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सीहोर में नकली कीटनाशक बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़, 1.25 करोड़ का माल जब्त

सीहोर जिले में नकली कीटनाशक बनाने और बाजार में खपाने वाले नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इस दौरान नामी कृषि कंपनियों के ब्रांड के नाम पर तैयार किए जा रहे कथित नकली कीटनाशक, रसायन, पैकिंग सामग्री और पैकेजिंग मशीनरी जब्त की गई।

मोहम्मद नवेद

मोहम्मद नवेद

एडिटर

14 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
सीहोर में नकली कीटनाशक बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़, 1.25 करोड़ का माल जब्त
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सीहोर और भैरूंदा में कृषि विभाग की बड़ी कार्रवाई

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में नकली कीटनाशक बनाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। कृषि विभाग की टीम ने पाइरेसी डिफेंस फोर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर सीहोर और भैरूंदा क्षेत्र में स्थित कई ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई में नामी कृषि कंपनियों के ब्रांड नाम का इस्तेमाल कर तैयार किए जा रहे नकली कीटनाशकों, रसायनों और भारी मात्रा में पैकिंग सामग्री बरामद की गई है।

अधिकारियों के अनुसार, जब्त की गई सामग्री की कुल बाजार कीमत 1.25 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। यह गिरोह लंबे समय से किसानों को गुमराह कर बाजार में नकली उत्पाद खपा रहा था। छापेमारी के दौरान मौके से पैकिंग मशीनें और कच्चा माल भी बरामद किया गया है, जिसका उपयोग कीटनाशकों को असली ब्रांड के रूप में पेश करने के लिए किया जाता था।

घर और गोदामों में चल रहा था अवैध कारोबार

जांच में सामने आया है कि यह अवैध कारोबार आवासीय परिसरों और गोदामों से संचालित किया जा रहा था। भैरूंदा की श्रीराम कॉलोनी में मुकेश कुशवाहा के घर और गोदाम पर जब टीम ने दबिश दी, तो वहां चार महिलाएं कथित रूप से नकली कीटनाशकों की पैकिंग करती पाई गईं। नसरुल्लागंज में भी इसी तरह की गतिविधियां सामने आई हैं, जहां घरों के भीतर पैकिंग का काम चल रहा था।

मौके से इंडोफिल इंडस्ट्रीज, बेयर क्रॉप साइंस, क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन और इंसेक्टिसाइड्स इंडिया जैसी बड़ी कंपनियों के नाम से छपी पैकिंग सामग्री मिली है। इन कंपनियों के उत्पादों जैसे M-45, नेटिवो, एंट्राकोल और राइस एक्ट के नाम पर नकली कीटनाशक तैयार किए जा रहे थे। कृषि विभाग के सहायक संचालक अनिल कुमार जाट ने बताया कि कंपनियों की ओर से पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने के लिए प्रतिवेदन दिए गए हैं।

मार्केट सर्वे के बाद बिछाया गया जाल

इस कार्रवाई की नींव एक विस्तृत मार्केट सर्वे के बाद रखी गई। पाइरेसी डिफेंस फोर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक विजय पंडित ने बताया कि उन्हें बाजार में क्लाइंट कंपनियों के नकली उत्पाद बिकने की सूचना मिली थी। इसके बाद संदिग्ध उत्पादों की पहचान की गई और उनके निर्माण से जुड़े ठिकानों का पता लगाया गया। पुख्ता जानकारी मिलने के बाद ही कृषि विभाग के साथ मिलकर यह संयुक्त अभियान चलाया गया।

कार्रवाई के दौरान एक मुख्य आरोपी मौके से फरार होने में सफल रहा। अधिकारियों का मानना है कि यह व्यक्ति तैयार नकली उत्पादों को अलग-अलग बाजारों में सप्लाई करने का मुख्य सूत्रधार था। पुलिस अब उसकी तलाश में जुटी है। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया एसडीओ स्तर से की जा रही है।

नेटवर्क के खुलासे की उम्मीद

कृषि विभाग और पुलिस की टीम अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, नकली कीटनाशकों के निर्माण, पैकिंग और सप्लाई चेन से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं। इस घटना ने किसानों के बीच चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि नकली कीटनाशकों के इस्तेमाल से फसलों को भारी नुकसान होने का खतरा रहता है।

फिलहाल, जब्त की गई सामग्री को कृषि विभाग ने अपने कब्जे में ले लिया है और संबंधित कंपनियों को सूचित कर दिया गया है। पुलिस फरार आरोपी की तलाश के लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे हमेशा अधिकृत विक्रेताओं से ही कृषि उत्पाद खरीदें और किसी भी संदिग्ध उत्पाद की सूचना तुरंत विभाग को दें।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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