डिंडौरी तालाब सौंदर्यीकरण में बड़ा घोटाला: 68 लाख के प्रोजेक्ट में तालाब के भीतर बिछाई सीवर लाइन, अधिकारियों पर गिरेगी गाज
Dindori pond beautification project probe report reveals sewer line corruption scandal. डिंडौरी नगर परिषद में अमृत 2.0 योजना के तहत पुरानी डिंडौरी जलाशय के सौंदर्यीकरण में तकनीकी और वित्तीय गड़बड़ियां सामने आई हैं। जांच रिपोर्ट में तत्कालीन सीएमओ, इंजीनियर और राजस्व अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच, निलंबन और एफआईआर की सिफारिश की गई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

अमृत 2.0 योजना में धांधली का खुलासा
डिंडौरी नगर परिषद में अमृत 2.0 योजना के तहत पुरानी डिंडौरी जलाशय के सौंदर्यीकरण कार्य में गंभीर वित्तीय और तकनीकी अनियमितताएं सामने आई हैं। कलेक्टर द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में इस परियोजना में बरती गई भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार की पुष्टि की है। रिपोर्ट के अनुसार, जिस जलाशय को सुंदर बनाने के लिए लाखों का बजट आवंटित किया गया था, उसे निर्माण कार्यों के दौरान ही बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया।
इस परियोजना के लिए कुल 68 लाख रुपए का बजट स्वीकृत किया गया था, जिसमें से अब तक करीब 42 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं। जांच में पाया गया कि वार्ड क्रमांक 12 और 13 के पास सौंदर्यीकरण के नाम पर तालाब के भीतर ही सीवर लाइन और मेनहोल का निर्माण कर दिया गया। इसके अलावा, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के खराब होने के कारण शहर का दूषित पानी सीधे जलाशय में मिल रहा है, जिससे तालाब का जलस्तर और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हुए हैं।
बिना एनओसी के हुआ घटिया निर्माण
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि इस परियोजना को क्रियान्वित करते समय नगर परिषद, एमपीयूडीसी और जल संसाधन विभाग ने नियमों को ताक पर रख दिया। निर्माण कार्य शुरू करने के लिए आवश्यक तकनीकी स्वीकृतियां और एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) तक नहीं ली गईं। इसके अतिरिक्त, जलाशय के आसपास हो रहे अतिक्रमण को रोकने में भी प्रशासन पूरी तरह विफल रहा, जिसके कारण तालाब की जल भंडारण क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
अधिकारियों की मिलीभगत के कारण न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ, बल्कि एक महत्वपूर्ण जल स्रोत को भी खतरे में डाल दिया गया। घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग और बिना योजना के किए गए कार्यों ने इस पूरे सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट को एक घोटाले में बदल दिया है।
अधिकारियों पर एफआईआर की सिफारिश
जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन सीएमओ अमित तिवारी, इंजीनियर शिवराज बघेल, तहसीलदार आरपी मार्को, राजस्व निरीक्षक हेमंत उइके और पटवारी बलिराम भवेदी की भूमिका को संदिग्ध माना है। इन सभी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने और निलंबन की अनुशंसा की गई है। साथ ही, दोष सिद्ध होने की स्थिति में ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा) या लोकायुक्त के माध्यम से एफआईआर दर्ज कराने की सिफारिश की गई है।
पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच दल ने थर्ड पार्टी ऑडिट कराने का भी सुझाव दिया है ताकि वित्तीय अनियमितताओं की सटीक मात्रा का पता लगाया जा सके। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों में हड़कंप मच गया है।
प्रशासन का रुख और आगे की कार्रवाई
इस मामले में देरी को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, डिंडौरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने स्पष्ट किया है कि जांच टीम ने अभी केवल अंतरिम रिपोर्ट सौंपी है। उन्होंने कहा कि जैसे ही अंतिम रिपोर्ट प्राप्त होगी, उसके आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और विस्तृत प्रतिवेदन राज्य शासन को भेजा जाएगा।
फिलहाल, स्थानीय नागरिक इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इस रिपोर्ट पर क्या कदम उठाती है और क्या वास्तव में जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की जाती है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
