धार: जर्जर स्कूल भवन में जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर 400 छात्र
धार जिले के दिग्ठान स्थित शासकीय बालक माध्यमिक विद्यालय की जर्जर हालत ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां कक्षा 9वीं से 12वीं तक के करीब 400 छात्र असुरक्षित माहौल में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मध्य प्रदेश के धार जिले के दिग्ठान स्थित शासकीय बालक माध्यमिक विद्यालय की बदहाल स्थिति ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां कक्षा 9वीं से 12वीं तक के करीब 400 छात्र अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल भवन की जर्जर अवस्था किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है, लेकिन अब तक ठोस मरम्मत का कार्य नहीं हो सका है।
दरारें और टपकती छत से जूझते छात्र
विद्यालय की इमारत का ढांचा पूरी तरह से कमजोर हो चुका है। दीवारों में गहरी दरारें साफ देखी जा सकती हैं, और कई स्थानों पर प्लास्टर उखड़ जाने के कारण लोहे के सरिए बाहर निकल आए हैं। सबसे भयावह स्थिति बारिश के दौरान होती है, जब टीन की छत में बने बड़े छेदों से पानी सीधे कक्षाओं के भीतर गिरता है। इससे छात्रों की किताबें और कॉपियां भीग जाती हैं, जिससे उनकी पढ़ाई बुरी तरह बाधित होती है।
छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि वे हर दिन डर के साए में स्कूल आते हैं। उन्हें हमेशा इस बात का अंदेशा बना रहता है कि कहीं छत का कोई हिस्सा या कमजोर दीवार उनके ऊपर न गिर जाए। स्कूल की यह स्थिति न केवल शैक्षणिक वातावरण को खराब कर रही है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा बनी हुई है।
बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव
स्कूल में केवल भवन ही जर्जर नहीं है, बल्कि यहां मूलभूत सुविधाओं का भी भारी अभाव है। पीने के पानी के लिए पूरे स्कूल में केवल एक ड्रम रखा गया है, जिसकी नियमित सफाई तक नहीं होती। इसके अलावा, परिसर में बाउंड्रीवाल न होने के कारण सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है। परिसर में फैली झाड़ियों के कारण मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है, जिससे छात्रों में बीमारियों के फैलने की आशंका बनी रहती है।
इसी परिसर में संचालित प्राथमिक विद्यालय की स्थिति और भी दयनीय है। भवन के खराब होने के कारण पहली से पांचवीं कक्षा तक के सभी बच्चों को एक ही कमरे में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है, जिससे छोटे बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ रहा है।
छात्रों की आपबीती और प्रशासन का रुख
कक्षा 11वीं के छात्र हर्षवर्धन राठौर ने बताया कि स्कूल काफी पुराना है और पहले भी एक दीवार गिरने की घटना हो चुकी है। इसके बावजूद प्रशासन ने सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं। छात्रों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे उनमें भारी आक्रोश और डर है।
इस मामले पर जनजातीय कार्य विभाग की जिला अधिकारी पारुल जैन ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि भवन की स्थिति जर्जर है और विभाग को इस संबंध में लिखित सूचना प्राप्त होती है, तो वे तत्काल निरीक्षण करवाएंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच के बाद भवन की वास्तविक स्थिति को देखते हुए उचित और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, 400 छात्रों का भविष्य और सुरक्षा भगवान भरोसे है। ग्रामीण और अभिभावक अब प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द स्कूल भवन की मरम्मत कराई जाए या वैकल्पिक व्यवस्था की जाए ताकि बच्चों को सुरक्षित माहौल में शिक्षा मिल सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!