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डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को फिर मिली 21 दिन की फरलो, सुनारिया जेल से आया बाहर

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम एक बार फिर रोहतक की सुनारियां जेल से बाहर आ गया है। राम रहीम की 21 दिन की फरलो मंजूर हुई है।

मुश्ताक अहमद खान

मुश्ताक अहमद खान

Editor In Chief

25 अगस्त 20262 मिनट पढ़ें
डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को फिर मिली 21 दिन की फरलो, सुनारिया जेल से आया बाहर
मूल स्रोत

नौ साल में 17वीं बार जेल से बाहर आए राम रहीम

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम एक बार फिर रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर आ गया है। मंगलवार सुबह करीब 6 बजकर 5 मिनट पर उसे 21 दिनों की फरलो पर रिहा किया गया। जेल से निकलने के बाद वह कड़ी सुरक्षा के बीच सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय के लिए रवाना हो गया है। अपनी फरलो की अवधि के दौरान वह सिरसा डेरे में ही रहेगा।

राम रहीम के जेल से बाहर आने का सिलसिला पिछले नौ वर्षों से लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। अगस्त 2017 में साध्वियों के यौन शोषण मामले में सजा सुनाए जाने के बाद से यह 17वीं बार है जब उसे पैरोल या फरलो दी गई है। इससे पहले इस साल जनवरी में उसे 40 दिन की पैरोल मिली थी, जिसके बाद मई में भी उसे 30 दिन की राहत दी गई थी। वह करीब दो महीने पहले ही 26 जून को वापस जेल लौटा था।

कानूनी मामलों की वर्तमान स्थिति

राम रहीम को 25 अगस्त 2017 को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म का दोषी करार दिया था। इसके बाद 28 अगस्त 2017 को उसे कुल 20 साल की सजा सुनाई गई थी, जिसके तहत वह वर्तमान में अपनी सजा काट रहा है। इसके अलावा उस पर अन्य गंभीर मामले भी दर्ज थे, जिनमें उसे अदालती राहत मिली है।

डेरा मैनेजर रणजीत सिंह हत्याकांड में उसे पहले उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, लेकिन मई 2024 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उसे बरी कर दिया। वहीं, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में भी उसे निचली अदालत ने दोषी माना था, लेकिन 7 मार्च 2026 को हाईकोर्ट ने उस दोषसिद्धि को रद्द कर दिया। हालांकि, इस फैसले के खिलाफ छत्रपति के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है, जिसे अगस्त 2026 में सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया गया है।

पैरोल और फरलो के नियम

कानूनी प्रावधानों के अनुसार, पैरोल और फरलो दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। पैरोल आमतौर पर किसी विशेष पारिवारिक आपात स्थिति, जैसे किसी परिजन की मृत्यु या बीमारी के आधार पर दी जाती है। इसमें कैदी को कस्टडी या रेगुलर पैरोल के तहत बाहर रहने की अनुमति मिलती है। इसके लिए सजा का एक निश्चित हिस्सा पूरा करना अनिवार्य होता है।

दूसरी ओर, फरलो कैदी का एक कानूनी अधिकार माना जाता है, जिसके लिए किसी विशेष आपातकालीन स्थिति की आवश्यकता नहीं होती है। राज्य सरकारों के अपने नियम और दिशा-निर्देश होते हैं, जिनके आधार पर कैदियों को फरलो प्रदान की जाती है। राम रहीम को मिली यह 21 दिन की फरलो इन्हीं नियमों के तहत स्वीकृत की गई है।

सुरक्षा और आगे की प्रक्रिया

राम रहीम की रिहाई के मद्देनजर प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। सिरसा डेरे में उसके प्रवास के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय पुलिस और प्रशासन सतर्क है। फरलो की अवधि समाप्त होने के बाद उसे वापस सुनारिया जेल में रिपोर्ट करना होगा। इस दौरान उसे निर्धारित शर्तों का पालन करना अनिवार्य है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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