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दिल्ली वोटर लिस्ट में गड़बड़ी: अरविंद केजरीवाल और रेखा गुप्ता समेत कई दिग्गजों को चुनाव आयोग का नोटिस

चुनाव अधिकारियों ने उनके एन्यूमरेशन फॉर्म में गड़बड़ियां बताई हैं। हालांकि, रेखा गुप्ता की वोटर एंट्री वैलिडेट कर दी गई है।

मोहम्मद नवेद

मोहम्मद नवेद

एडिटर

19 सितंबर 20263 मिनट पढ़ें
दिल्ली वोटर लिस्ट में गड़बड़ी: अरविंद केजरीवाल और रेखा गुप्ता समेत कई दिग्गजों को चुनाव आयोग का नोटिस
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वोटर लिस्ट में नाम और उम्र को लेकर विसंगतियां

दिल्ली में आगामी चुनावों की तैयारियों के बीच चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया चर्चा में है। आयोग ने दिल्ली के कई प्रमुख राजनेताओं को नोटिस जारी किए हैं, जिनमें मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल शामिल हैं। इन नोटिसों का मुख्य कारण एन्यूमरेशन फॉर्म में पाई गई तकनीकी खामियां और विसंगतियां बताई जा रही हैं।

आयोग के अनुसार, अरविंद केजरीवाल को नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के उनके वोटर रिकॉर्ड को पिछली SIR प्रक्रिया से लिंक न होने के कारण नोटिस भेजा गया है। उनके अलावा उनके परिवार के सदस्यों, जैसे पत्नी सुनीता केजरीवाल और उनके माता-पिता को भी इसी तरह के नोटिस प्राप्त हुए हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मामले में जांच के बाद उनकी एंट्री को वैलिडेट कर दिया गया है, जिससे उनका नाम अब शालीमार बाग विधानसभा की अंतिम मतदाता सूची में शामिल हो सकेगा।

33 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, यह समस्या केवल कुछ नेताओं तक सीमित नहीं है। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में कुल 33.13 लाख मतदाताओं के फॉर्म में विभिन्न प्रकार की गड़बड़ियां पाई गई हैं, जिनमें से अब तक 31.63 लाख लोगों को नोटिस भेजे जा चुके हैं। ये नोटिस मुख्य रूप से घर-घर सत्यापन अभियान के दौरान जमा किए गए फॉर्मों में पिछली SIR (2002) के रिकॉर्ड का मिलान न होने के कारण जारी किए गए हैं।

प्रभावित होने वाले अन्य प्रमुख नामों में दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल और भाजपा नेता सुधांशु मित्तल शामिल हैं। वीरेंद्र सचदेवा ने स्वीकार किया कि उन्हें नाम से जुड़ी त्रुटि के कारण नोटिस मिला है और उन्होंने इसे आवश्यक दस्तावेजों के साथ सुधारने का आश्वासन दिया है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगे की प्रक्रिया

इस घटनाक्रम पर आम आदमी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी के नेशनल मीडिया इंचार्ज अनुराग धांडा ने सवाल उठाया कि तीन बार के मुख्यमंत्री और उनके परिवार का नाम वोटर लिस्ट से गायब होना एक गंभीर प्रक्रियात्मक चूक है। उन्होंने इस पूरी कवायद की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि दावे और आपत्तियां जमा करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित की गई है। नोटिस प्राप्त करने वाले सभी मतदाताओं को 29 अक्टूबर तक अपने जवाब और संबंधित दस्तावेज जमा करने होंगे। इसके बाद ही अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। आयोग ने इन सभी 33 लाख मतदाताओं की सूची अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भी सार्वजनिक कर दी है ताकि लोग अपनी स्थिति की जांच कर सकें।

विपक्ष का विरोध

यह पहली बार नहीं है जब SIR प्रक्रिया विवादों में रही है। इससे पूर्व जून महीने में 23 विपक्षी दलों और निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पत्र लिखकर इस प्रक्रिया को मनमाना और लोकतंत्र के लिए खतरा बताया था। विपक्षी दलों का तर्क है कि चुनाव आयोग की यह प्रक्रिया मतदाताओं को परेशान करने वाली है।

फिलहाल, दिल्ली का CEO कार्यालय इन विसंगतियों को दूर करने के लिए काम कर रहा है। 4 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि कितने मतदाताओं ने अपनी जानकारी को सफलतापूर्वक अपडेट कर लिया है और कितने लोग इस प्रक्रिया के कारण सूची से बाहर हुए हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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