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जंतर-मंतर प्रदर्शन: पुलिस ने फेस रिकॉग्निशन तकनीक से पहचाने 2500 अपराधी

Delhi Police uses Face Recognition System at Jantar Mantar protest. दिल्ली पुलिस फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (FCR) के जरिए जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट करने वालों की पहचान कर रही है। 216 लोग ऐसे मिले हैं जिनका पिछला क्रिमिनल रिकॉर्ड रहा है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

24 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 414
जंतर-मंतर प्रदर्शन: पुलिस ने फेस रिकॉग्निशन तकनीक से पहचाने 2500 अपराधी
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प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए तकनीक का सहारा

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर हुए हालिया प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों की पहचान के लिए फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (FCR) का उपयोग किया है। पुलिस के अनुसार, इस तकनीक के माध्यम से करीब 2500 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। ये संदिग्ध प्रदर्शनकारी दिल्ली के विभिन्न जिलों से संबंधित बताए जा रहे हैं।

जांच के दौरान पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और मौके पर लगे सीसीटीवी फुटेज का गहन विश्लेषण किया। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और सुरक्षाबलों पर हमलों की घटनाओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। इन फुटेज के जरिए उन लोगों को चिन्हित किया गया है जो उपद्रव में सक्रिय रूप से शामिल थे।

हिंसा और सुरक्षाबलों पर हमले की जांच

बीते 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई थी। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इस दौरान 50 से अधिक पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हुए थे।

रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) पर भी प्रदर्शन के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग और पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप लगे हैं। इन आरोपों के बाद RAF ने विभागीय जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि किन परिस्थितियों में जवानों को बल प्रयोग करना पड़ा और क्या यह कार्रवाई प्रोटोकॉल के अनुरूप थी।

पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की खबरों का खंडन

सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों को दिल्ली पुलिस ने पूरी तरह खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया गया था कि प्रदर्शन के दौरान किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई या निलंबन किया गया है। स्पेशल कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) देवेश कुमार श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि पुलिस ने कानून के दायरे में रहकर अपनी जिम्मेदारी निभाई है।

उन्होंने बताया कि झड़प में घायल हुए अधिकांश पुलिसकर्मियों को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है और वे वापस अपनी ड्यूटी पर लौट रहे हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

आम नागरिकों के लिए एडवाइजरी

सुरक्षा के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने नागरिकों को प्रभावित इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। साथ ही, ऐप-आधारित कैब सेवाओं, फूड डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स कंपनियों को भी प्रतिबंधित क्षेत्रों में अपने संचालन को नियंत्रित रखने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम जनता को कम से कम असुविधा हो और सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रहे।

आगामी दिनों में पुलिस की जांच का दायरा और बढ़ सकता है। जिन लोगों की पहचान आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्तियों के रूप में हुई है, उनके खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी रहेगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन की आड़ में कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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