जंतर-मंतर पर प्रदर्शन: फेस रिकॉग्निशन सिस्टम से 216 अपराधियों की पहचान, पुलिस ने किया खुलासा
Delhi Police identifies suspects at protest site using Face Recognition System. दिल्ली पुलिस फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (FCR) से जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट करने वालों की पहचान कर रही है। इस दौरान प्रोटेस्ट साइट पर ऐसे आरोपियों की जानकारी मिली है जो पहले से ही दिल्ली पुलिस के क्रिमिनल रिकॉर्ड में दर्ज है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया है। पुलिस ने आधुनिक फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) का उपयोग करते हुए प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों की पहचान की है। इस तकनीकी जांच के दौरान पुलिस को चौंकाने वाले आंकड़े हाथ लगे हैं, जिसमें 216 ऐसे व्यक्तियों की पहचान हुई है जिनके नाम पहले से ही पुलिस के आपराधिक रिकॉर्ड में दर्ज हैं।
तकनीकी निगरानी से हुआ खुलासा
दिल्ली पुलिस के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह पहचान प्रक्रिया सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पोस्ट और प्रदर्शन स्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज के विश्लेषण के आधार पर की गई है। पुलिस ने इन फुटेज को अपने डेटाबेस में मौजूद अपराधियों की तस्वीरों से मिलान किया, जिसके बाद फेस रिकॉग्निशन सिस्टम ने इन 216 संदिग्धों की पुष्टि की। पुलिस का दावा है कि प्रदर्शन की आड़ में कई अपराधी भी शामिल हो रहे थे, जिनकी पहचान अब स्पष्ट हो चुकी है।
इस जांच के दौरान सामने आए आंकड़ों के अनुसार, इन अपराधियों का संबंध दिल्ली के विभिन्न जिलों से है। सबसे अधिक संख्या में अपराधी वेस्ट दिल्ली क्षेत्र से पाए गए हैं, जिनकी संख्या 26 है। इसके अतिरिक्त, नॉर्थ ईस्ट दिल्ली से 23 और साउथ दिल्ली से 22 अपराधियों की पहचान की गई है। बाकी संदिग्ध दिल्ली के अन्य अलग-अलग इलाकों से ताल्लुक रखते हैं।
सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर असर
जंतर-मंतर जैसे संवेदनशील इलाकों में बड़ी संख्या में आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की मौजूदगी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस का मानना है कि प्रदर्शनों के दौरान भीड़ का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने अब निगरानी का दायरा बढ़ा दिया है और संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है।
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि या कानून को हाथ में लेने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फेस रिकॉग्निशन सिस्टम का उपयोग भविष्य में भी प्रदर्शन स्थलों पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया जाता रहेगा ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।
आगे की कार्रवाई की तैयारी
पहचाने गए इन 216 व्यक्तियों के खिलाफ पुलिस अब उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और वर्तमान गतिविधियों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या ये लोग किसी विशेष उद्देश्य से प्रदर्शन में शामिल हुए थे या फिर वे केवल भीड़ का हिस्सा बनकर छिपने का प्रयास कर रहे थे। इस खुलासे के बाद से जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा बलों की तैनाती और सतर्कता में इजाफा देखा जा रहा है।
दिल्ली पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। पुलिस का यह कदम न केवल प्रदर्शन स्थलों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उन लोगों के लिए भी एक चेतावनी है जो कानून से बचने के लिए सार्वजनिक आयोजनों का सहारा लेते हैं। आने वाले दिनों में पुलिस इन संदिग्धों की गतिविधियों पर और अधिक बारीकी से नजर रखेगी।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
