ब्रेकिंग
उदयपुर: पुलिस हिरासत से चकमा देकर भागे दो नाबालिग चोर, पहाड़ियों में तलाश जारीभोपाल के कटारा हिल्स में तेंदुए की दस्तक: रिहायशी इलाकों में दहशत, पार्क में आवाजाही पर लगी रोकग्वालियर में हनीट्रैप का खौफ: ब्लैकमेलिंग से तंग आकर युवक ने की आत्महत्या, दंपति पर केस दर्जलखनऊ: लारी कार्डियोलॉजी सेंटर में हर साल 8500 से ज्यादा हार्ट अटैक मरीजों को मिल रहा नया जीवनसुपौल: अवैध लेनदेन के विवाद में युवक का अपहरण, पुलिस ने 12 घंटे के भीतर सकुशल कराया बरामदकरौली की बेटी प्रिया गुप्ता का कमाल: पहले ही प्रयास में NEET-PG में लहराया सफलता का परचमधौलपुर: पिकअप हादसे में 4 मौतों के बाद प्रशासन सख्त, पोखर किनारे से हटाए गए अवैध निर्माणझांसी के कारोबारी का रहस्यमय परिस्थितियों में निधन, मध्य प्रदेश की नदी में मिला शव
उदयपुर: पुलिस हिरासत से चकमा देकर भागे दो नाबालिग चोर, पहाड़ियों में तलाश जारीभोपाल के कटारा हिल्स में तेंदुए की दस्तक: रिहायशी इलाकों में दहशत, पार्क में आवाजाही पर लगी रोकग्वालियर में हनीट्रैप का खौफ: ब्लैकमेलिंग से तंग आकर युवक ने की आत्महत्या, दंपति पर केस दर्जलखनऊ: लारी कार्डियोलॉजी सेंटर में हर साल 8500 से ज्यादा हार्ट अटैक मरीजों को मिल रहा नया जीवनसुपौल: अवैध लेनदेन के विवाद में युवक का अपहरण, पुलिस ने 12 घंटे के भीतर सकुशल कराया बरामदकरौली की बेटी प्रिया गुप्ता का कमाल: पहले ही प्रयास में NEET-PG में लहराया सफलता का परचमधौलपुर: पिकअप हादसे में 4 मौतों के बाद प्रशासन सख्त, पोखर किनारे से हटाए गए अवैध निर्माणझांसी के कारोबारी का रहस्यमय परिस्थितियों में निधन, मध्य प्रदेश की नदी में मिला शव

दिल्ली पुलिस के परिजनों का दर्द: संसद मार्च हिंसा के दौरान अपनों को लहूलुहान देख सहम गए परिवार

दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों के परिजनों ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता की। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और 20 जुलाई को संसद मार्च में हुई हिंसा पर अपना पक्ष रखा।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

31 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
दिल्ली पुलिस के परिजनों का दर्द: संसद मार्च हिंसा के दौरान अपनों को लहूलुहान देख सहम गए परिवार
मूल स्रोत

पुलिसकर्मियों के परिवारों ने बयां किया अपना दर्द

हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद अब दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों के परिवारों ने मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में इन परिवारों ने उस भयावह स्थिति का जिक्र किया, जिसका सामना उनके अपनों ने ड्यूटी के दौरान किया था। परिवारों का आरोप है कि घटना के बाद पुलिस के खिलाफ एक गलत नैरेटिव गढ़ा गया, जबकि हकीकत में सुरक्षाकर्मी खुद हिंसा का शिकार हुए थे।

एक पुलिस जवान की बेटी गुंजन ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि उनके पिता ड्यूटी के दौरान लगातार उन्हें बता रहे थे कि यह प्रदर्शन अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें असामाजिक तत्व शामिल हो गए हैं। 20 जुलाई की रात जब उनके पिता घर लौटे, तो उनकी वर्दी खून से लथपथ थी और उनके सिर पर गंभीर चोटें थीं, जिसके लिए उन्हें पांच टांके लगाने पड़े। गुंजन ने सवाल उठाया कि जो लोग उनके पिता को घायल कर रहे थे, वही अब पुलिस को अपराधी साबित करने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटा रहे हैं।

पत्थरबाजी और हमले से सहमे परिजन

दिल्ली पुलिस में कार्यरत एक एएसआई की पत्नी सीमा ने उस शाम का मंजर याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने अपने पति को फोन किया, तो वे अस्पताल में थे। भीड़ में मौजूद उपद्रवियों ने पत्थर और घातक हथियारों से पुलिस जवानों पर हमला किया था। सीमा के अनुसार, उनके पति ने बताया कि संसद की सुरक्षा के लिए लगाई गई बैरिकेडिंग को न केवल तोड़ा गया, बल्कि पुलिस बल पर जानलेवा हमला भी किया गया। ड्यूटी के दौरान पहना गया हेलमेट पूरी तरह टूट चुका था, जिसे देखकर उनका परिवार बुरी तरह सहम गया था।

इन परिवारों का मुख्य दुख इस बात को लेकर है कि सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर केवल एकतरफा नैरेटिव चलाया जा रहा है। उनका कहना है कि यह प्रचारित किया जा रहा है कि पुलिस ने छात्रों को पीटा, जबकि हकीकत यह है कि पुलिसकर्मी खुद भीड़ की हिंसा का शिकार हुए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके परिजन अपनी ड्यूटी निभा रहे थे और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान उन्हें निशाना बनाया गया।

संसद में सुरक्षाकर्मियों के अधिकारों की मांग

प्रेस वार्ता के दौरान परिवारों ने संसद में बैठे जनप्रतिनिधियों से भी अपील की है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों पर हो रहे हमलों और उनके अधिकारों के मुद्दे को संसद में उठाया जाना चाहिए। परिवारों का मानना है कि यदि सुरक्षाकर्मियों के साथ हो रही हिंसा को नजरअंदाज किया गया, तो यह उनके मनोबल को तोड़ने जैसा होगा। उन्होंने मांग की कि 20 जुलाई की घटना की निष्पक्ष जांच हो और पुलिस के खिलाफ फैलाए जा रहे दुष्प्रचार पर रोक लगे।

वर्तमान में, ये परिवार कानूनी लड़ाई भी लड़ रहे हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है ताकि पुलिसकर्मियों के पक्ष को भी सही तरीके से रखा जा सके। परिवारों का कहना है कि वे केवल यह चाहते हैं कि सच्चाई सामने आए और जो लोग ड्यूटी पर तैनात जवानों पर हमला करने के दोषी हैं, उन पर सख्त कार्रवाई हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्दी का सम्मान सर्वोपरि है और उसे अपराधी साबित करने की कोशिशें बंद होनी चाहिए।

आगे की राह और स्थिति का विश्लेषण

इस घटना के बाद से दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और प्रदर्शनों को लेकर बहस तेज हो गई है। एक तरफ प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर मुखर हैं, तो दूसरी तरफ कानून लागू करने वाली एजेंसियां और उनके परिवार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। पुलिस परिवारों की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और न्यायपालिका इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं और क्या सुरक्षाकर्मियों के परिवारों को न्याय मिल पाता है।

SponsoredMushfan Digital Studios - We Build Brands. We Grow Businesses.

टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

संबंधित खबरें