दिल्ली सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: कैग रिपोर्ट में 68 हजार करोड़ के फर्जी बिल और गायब फाइलों का खुलासा
दिल्ली में कैग रिपोर्ट के आने के बाद कैबिनेट मंत्री प्रवेश वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केजरीवाल सरकार पर निशाने साधे है। मंत्री का दावा है कि कैग की रिपोर्ट केजरीवाल सरकार का लिखित भ्रष्टाचार का कच्चा चिट्ठा है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

कैग रिपोर्ट ने खोली केजरीवाल सरकार के दावों की पोल
दिल्ली की केजरीवाल सरकार एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपों के घेरे में है। हाल ही में सामने आई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने दिल्ली सरकार के कामकाज और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर कैबिनेट मंत्री प्रवेश वर्मा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने इस रिपोर्ट को दिल्ली सरकार के भ्रष्टाचार का लिखित कच्चा चिट्ठा करार दिया है।
प्रवेश वर्मा ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों में वित्तीय अनियमितताओं की पराकाष्ठा हो चुकी है। उन्होंने कहा कि कैग की रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए हैं, वे न केवल चौंकाने वाले हैं बल्कि सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को भी उजागर करते हैं। मंत्री के अनुसार, यह रिपोर्ट साबित करती है कि दिल्ली में जनता के पैसे का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया है।
68 हजार करोड़ के बोगस ई-वे बिल का मामला
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रवेश वर्मा ने कैग रिपोर्ट के हवाले से दावा किया कि 31 मार्च 2023 तक दिल्ली में 68,680 करोड़ रुपये के फर्जी ई-वे बिल तैयार किए गए। उन्होंने बताया कि ऐसे 8,334 कारोबारी पाए गए जिनका जीएसटी रजिस्ट्रेशन रद्द होने के बावजूद उनके नाम पर बिल काटे जाते रहे। इसके अतिरिक्त, लगभग 70,410 करोड़ रुपये का टैक्स रेवेन्यू पिछले पांच वर्षों से बड़े व्यापारियों के पास पेंडिंग पड़ा है, जिसे वसूलने में सरकार पूरी तरह विफल रही है।
फाइलों के गायब होने के मामले पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि नियमों को दरकिनार कर 1,185 मैनुअल टेंडर जारी किए गए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इन टेंडर्स में से केवल 3 फीसदी का ही रिकॉर्ड विभाग के पास मौजूद है, जबकि 97 फीसदी कॉन्ट्रैक्ट अवॉर्ड की फाइलें सरकारी दफ्तरों से गायब हैं। यह सीधे तौर पर जवाबदेही से बचने की एक सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करता है।
सब्सिडी और निर्माण कार्यों में धांधली
मंत्री ने बिजली सब्सिडी में भी बड़े फर्जीवाड़े का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसे 50 हजार उपभोक्ता जिनका पूरे साल का बिल शून्य आया, उन्हें 17.81 करोड़ रुपये की सब्सिडी का भुगतान किया गया। साथ ही, 90 हजार ऐसे घर जो बंद पड़े थे, उनके नाम पर भी 11.88 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी गई। यह सरकारी खजाने की लूट का एक स्पष्ट उदाहरण है।
इसके अलावा, एलएनजेपी अस्पताल के निर्माण कार्य में भी भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। प्रवेश वर्मा ने आरोप लगाया कि तत्कालीन मंत्री सत्येंद्र जैन के कार्यकाल के दौरान प्रति बेड निर्माण लागत को 33 लाख रुपये से बढ़ाकर 72 लाख रुपये कर दिया गया था। इसी तरह, बापोला इंडस्ट्रियल पार्क के नाम पर भी पिछले 28 वर्षों से बिना किसी ठोस काम के करोड़ों रुपये का नुकसान दिखाया गया है।
राजनीतिक गलियारों में मची हलचल
कैग की इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद दिल्ली की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष ने सरकार से इन सभी मामलों पर श्वेत पत्र जारी करने और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। प्रवेश वर्मा के इन दावों ने आम आदमी पार्टी की 'ईमानदार राजनीति' के दावों पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली सरकार इन गंभीर आरोपों का क्या जवाब देती है और क्या इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई की जाती है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!