दिल्ली में साइकिल खरीद पर बड़ा विवाद: 4200 की साइकिल 6957 में खरीदने का आरोप, आप विधायकों ने किया प्रदर्शन
आम आदमी पार्टी के नेता दिल्ली में हुए साइकिल घोटाले पर शिक्षा मंत्री आशीष सूद का इस्तीफा मांगने साइकिल से विधानसभा पहुंच गए। भाजपा सरकार ने जो साइकिल 6957 रुपए में खरीदी थी, आप विधायक वहीं साइकिल 4200 रुपए में खरीद कर विधानसभा पहुंचे गए।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

साइकिल पर सवार होकर विधानसभा पहुंचे आप विधायक
दिल्ली में स्कूली छात्राओं के लिए खरीदी गई साइकिलों को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों ने राज्य सरकार पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी के विधायक साइकिल पर सवार होकर विधानसभा पहुंचे और शिक्षा मंत्री आशीष सूद के इस्तीफे की मांग की।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि सरकार ने बाजार भाव से काफी अधिक कीमत पर साइकिलें खरीदी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो साइकिल आम बाजार में 4200 रुपये में उपलब्ध है, उसे सरकार ने 6957 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदा है। इस अंतर को उन्होंने जनता के पैसे की सीधी लूट करार दिया है।
90 करोड़ रुपये के घोटाले का दावा
सौरभ भारद्वाज ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने कुल 1 लाख 30 हजार साइकिलें खरीदी हैं। यदि प्रति साइकिल 3000 रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया है, तो यह घोटाला लगभग 90 करोड़ रुपये का बैठता है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग ने मिलीभगत के जरिए इस राशि को ठिकाने लगाने का काम किया है।
आप नेताओं का आरोप है कि छात्राओं को बांटी जा रही साइकिलें और बाजार में उपलब्ध साइकिलें एक ही कंपनी (हीरो) की हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने साइकिलों के मॉडल के नाम के साथ छेड़छाड़ की है। बाजार में मिलने वाली साइकिल 'बोनफायर' मॉडल की है, जबकि सरकार द्वारा बांटी जा रही साइकिलों पर 'स्काइलर' नाम लिखकर दिया जा रहा है, ताकि अंतर को छिपाया जा सके।
टेंडर प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
बुराड़ी के विधायक संजीव झा ने टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात यह है कि टेंडर प्रक्रिया में हीरो साइकिल कंपनी खुद शामिल थी, लेकिन उसे दरकिनार कर एक निजी व्यापारी को ठेका दे दिया गया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि कोई व्यापारी निर्माता कंपनी से भी सस्ती साइकिल दे रहा है, तो यह स्पष्ट रूप से मिलीभगत और भ्रष्टाचार का मामला है।
तिलक नगर के विधायक जरनैल सिंह ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस घोटाले की राशि से 1 लाख अतिरिक्त साइकिलें खरीदी जा सकती थीं, जिससे और भी छात्राओं को लाभ मिलता। उन्होंने इसे सरकार की संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार का प्रतीक बताया।
आगे क्या हो सकता है?
आम आदमी पार्टी ने विधानसभा के भीतर इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की चेतावनी दी है। पार्टी का कहना है कि वे सदन में उन साइकिलों का मिलान भी करेंगे जो सरकार ने छात्राओं को बांटी हैं और जो वे बाजार से खरीदकर लाए हैं। इस विरोध प्रदर्शन के बाद अब शिक्षा विभाग और सरकार की ओर से इस पर स्पष्टीकरण का इंतजार है।
विपक्ष के इन गंभीर आरोपों ने दिल्ली की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। फिलहाल, सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन आने वाले दिनों में यह मामला सदन की कार्यवाही में हंगामे का कारण बन सकता है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!