मैहर में साइबर ठगी का जाल: राजस्थान पुलिस की दबिश, एक और संदिग्ध हिरासत में
राजस्थान पुलिस ने करीब 19 लाख रुपए की साइबर ठगी के मामले में मैहर जिले से एक और संदिग्ध को हिरासत में लिया है। राजस्थान के बारां जिले की पुलिस टीम रविवार को मैहर पहुंची और कियोस्क संचालक श्रीकांत लखेरा की निशानदेही पर एक संदिग्ध से पूछताछ के बाद उसे अपने साथ ले गई।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मैहर से जुड़ा साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क
मध्य प्रदेश के मैहर जिले में साइबर अपराधियों के खिलाफ राजस्थान पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। करीब 19 लाख रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले में राजस्थान के बारां जिले की पुलिस टीम ने मैहर में फिर से दबिश दी है। इस बार पुलिस ने एक और संदिग्ध को हिरासत में लिया है, जिससे मामले की कड़ियां जुड़ने की उम्मीद है।
यह पूरा मामला राजस्थान की द्रोपती बाई नामक महिला के साथ हुई धोखाधड़ी से संबंधित है। पीड़िता की जमीन डूब क्षेत्र में आने के कारण उन्हें मुआवजा मिला था, जिससे उन्होंने 18 लाख रुपये की सावधि जमा (FD) कराई थी। जून 2025 में बिना किसी ओटीपी, बैंक अलर्ट या फोन कॉल के उनकी एफडी को तोड़कर 18.93 लाख रुपये की राशि अवैध रूप से निकाल ली गई।
कैसे काम करता था ठगों का गिरोह
जांच के दौरान पुलिस को इस ठगी के तार मैहर से जुड़े होने के ठोस सबूत मिले। मामले में सबसे पहले 14 जुलाई को मैहर के डेल्हा गांव से राजन साकेत नामक ड्राइवर को हिरासत में लिया गया था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि राजन के बैंक खाते में 12.13 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। वह कमीशन काटकर बाकी रकम एटीएम के जरिए निकालकर आगे भेज देता था।
इस नेटवर्क में ई-मित्र सेंटर संचालक श्रीकांत लखेरा की भूमिका मुख्य मानी जा रही है। आरोप है कि श्रीकांत लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाता था और उनके एटीएम कार्ड व सिम कार्ड साइबर ठगों को उपलब्ध कराता था। ठगी की पूरी रकम इन्हीं खातों के जरिए रोटेट की जाती थी। फिलहाल श्रीकांत पुलिस रिमांड पर है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
रविवार को राजस्थान पुलिस की टीम ने श्रीकांत लखेरा को साथ लेकर मैहर में कई स्थानों पर दबिश दी। इस दौरान तीन संदिग्धों से गहन पूछताछ की गई, जिसके बाद पुलिस एक व्यक्ति को अपने साथ ले गई। पुलिस का मानना है कि इस पूरे गिरोह में कई और लोग शामिल हो सकते हैं जो स्थानीय स्तर पर बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम करते हैं।
साइबर पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि बिना ओटीपी के एफडी तोड़ने के लिए किस तकनीक का इस्तेमाल किया गया। यह मामला न केवल वित्तीय धोखाधड़ी का है, बल्कि सुरक्षा प्रणालियों में सेंधमारी का भी है। पुलिस अब उन सभी खातों की जांच कर रही है जो श्रीकांत के माध्यम से खोले गए थे।
फिलहाल, मुख्य आरोपी राजन साकेत को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। राजस्थान पुलिस की टीम मैहर में कैंप कर रही है ताकि इस पूरे साइबर नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके। आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
