लखीमपुर खीरी: शारदा नदी से निकलकर रिहायशी इलाकों में पहुंचा मगरमच्छ, ग्रामीणों में दहशत
गोला वनरेंज के रायपुर बीट स्थित पड़रिया तुला गांव में मगरमच्छ का खतरा बढ़ गया है। शारदा नदी और आसपास के तालाबों से निकलकर मगरमच्छ अब आबादी वाले क्षेत्रों और कच्चे रास्तों तक पहुंच रहे हैं, जिससे ग्रामीणों, किसानों और पशुपालकों में भय का माहौल है।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में गोला वन रेंज के अंतर्गत आने वाले रायपुर बीट में मगरमच्छों की बढ़ती सक्रियता ने स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ा दी है। शारदा नदी के निकट स्थित पड़रिया तुला गांव के पास मगरमच्छों का आबादी वाले क्षेत्रों में आना अब एक गंभीर समस्या बन गया है। नदी और आसपास के जल स्रोतों से निकलकर ये जीव अब रिहायशी इलाकों और कच्चे रास्तों तक पहुंचने लगे हैं, जिससे ग्रामीणों, किसानों और पशुपालकों में डर का माहौल है।
मुख्य मार्ग पर मगरमच्छ की मौजूदगी से हड़कंप
शनिवार की सुबह गुरुद्वारा से पहाड़ापुर को जोड़ने वाले कच्चे मार्ग पर एक विशाल मगरमच्छ देखा गया। यह मार्ग क्षेत्र के छह प्रमुख गांवों, जिनमें पहाड़ापुर, चौखड़ा, चौखड़िया, गोंधिया और पिपरिया शामिल हैं, के लिए मुख्य संपर्क मार्ग है। प्रतिदिन सैकड़ों किसान और पशुपालक अपने खेतों और चारागाहों तक जाने के लिए इसी रास्ते का उपयोग करते हैं। अचानक रास्ते में मगरमच्छ को देखकर वहां से गुजर रहे ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। कुछ लोगों ने इस दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में भी कैद किया है।
स्थानीय निवासी अश्वनी यादव ने बताया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार इस मार्ग पर मगरमच्छ देखे जा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मगरमच्छ अक्सर इसी रास्ते पर डेरा जमाए रहता है और अब तक कई बेसहारा पशुओं को अपना शिकार बना चुका है। ग्रामीणों को अब अपने बच्चों की सुरक्षा की चिंता सता रही है, जो इसी रास्ते से स्कूल आते-जाते हैं।
वन विभाग की कार्रवाई का इंतजार
वन विभाग के अधिकारियों ने मगरमच्छ के देखे जाने की पुष्टि की है। वन दरोगा नरेश कुमार ने बताया कि विभाग को घटना की सूचना मिली थी, लेकिन जब तक टीम मौके पर पहुंचती, मगरमच्छ पास के तालाबों या गन्ने के खेतों में छिप जाता है। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि जल्द ही क्षेत्र में जाल बिछाकर मगरमच्छ को पकड़ा जाएगा और उसे सुरक्षित रूप से शारदा नदी के दूरस्थ और गहरे जल क्षेत्र में छोड़ दिया जाएगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जब तक मगरमच्छ को पकड़ा नहीं जाता, तब तक स्कूल खुलने और छुट्टी के समय इस मार्ग पर वनकर्मियों की गश्त बढ़ाई जाए। इसके अलावा, लोगों को सचेत करने के लिए संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाने की भी मांग की गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।
बढ़ता खतरा और सुरक्षा के उपाय
शारदा नदी के तटीय इलाकों में वन्यजीवों का आबादी की ओर रुख करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। बरसात के मौसम में जल स्तर बढ़ने के कारण मगरमच्छ अक्सर रिहायशी इलाकों के करीब आ जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक नदी के किनारे सुरक्षा घेरा या उचित निगरानी नहीं होती, तब तक ग्रामीणों को सतर्क रहना होगा। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी के किनारे या जलभराव वाले क्षेत्रों के पास अकेले न जाएं और बच्चों को भी इन रास्तों पर सावधानी बरतने की सलाह दें।
फिलहाल, वन विभाग की टीम स्थिति पर नजर बनाए हुए है। ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए उठाए जाने वाले कदम ही यह तय करेंगे कि आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में मगरमच्छ का खतरा कितना कम हो पाता है। प्रशासन ने लोगों से धैर्य रखने और किसी भी तरह की छेड़छाड़ न करने की अपील की है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!