चित्तौड़गढ़ जेल वीडियो कांड: 10 गिरफ्तार, लापरवाही बरतने वाले 4 कर्मचारी निलंबित
चित्तौड़गढ़ जिला कारागृह के अंदर बंदियों द्वारा पार्टी करने, डांस करने और नशा करते हुए वीडियो बनाने का मामला अब और गंभीर हो गया है। इस मामले में कोतवाली थाना पुलिस अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

सुरक्षा में बड़ी चूक: जेल के अंदर पार्टी और नशा
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिला कारागृह में बंदियों द्वारा जेल के भीतर पार्टी करने, डांस करने और नशा करने के वीडियो वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया है। इस मामले ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि जेल प्रशासन ने अपनी आंतरिक जांच के बाद चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है।
मामले की शुरुआत तब हुई जब जेल के अंदर बनाए गए कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। इन वीडियो में बंदी जेल परिसर के भीतर नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए दिखाई दिए। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और जेल प्रशासन ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की, जिसके बाद जेल के भीतर से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए गए।
तलाशी अभियान में मिले मोबाइल और 10 गिरफ्तारियां
पुलिस के अनुसार, 24 जुलाई 2026 को तत्कालीन कारापाल द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट के आधार पर जांच शुरू हुई थी। 23 जुलाई को जेल परिसर की सघन तलाशी ली गई, जिसमें ए-वार्ड में बंद विचाराधीन बंदी मोहित की निशानदेही पर स्टोर रूम से दो मोबाइल फोन बरामद हुए। इनमें एक एंड्रॉयड और एक कीपैड फोन शामिल था। इन फोनों के जरिए ही बंदियों ने वीडियो बनाए और उन्हें बाहर भेजा था।
इस मामले में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें मोहित, भैरूलाल गुर्जर, सत्यनारायण गुर्जर, प्रहलाद राय गुर्जर, शोभालाल, विनोद गुर्जर, हर्षवर्धन सिंह राजपूत, नारायण लाल सुथार, दशरथ गुर्जर और मनोहर लाल जाट शामिल हैं। पुलिस अब इस बात की गहन पड़ताल कर रही है कि प्रतिबंधित मोबाइल जेल के अंदर तक कैसे पहुंचे और वीडियो को बाहर किसने प्रसारित किया।
जेल प्रशासन की कार्रवाई: चार कर्मचारी निलंबित
जेल महानिदेशक (डीजी) अशोक राठौड़ ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में चार जेल कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित किए गए कर्मचारियों में तत्कालीन जेलर ओंकार लाल, हवालदार महेंद्र सिंह, जेल प्रहरी रईस मोहम्मद और सुनीता शामिल हैं। हालांकि, इन कर्मचारियों का पहले ही अन्य स्थानों पर तबादला हो चुका था, लेकिन जांच रिपोर्ट के आधार पर उन पर यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
जेल महानिदेशक ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में इन कर्मचारियों की मिलीभगत पाई जाती है, तो उनके खिलाफ और भी सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे। इस निलंबन के बाद जेल विभाग के भीतर हड़कंप की स्थिति है और माना जा रहा है कि जांच का दायरा बढ़ने पर कई अन्य चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल
चित्तौड़गढ़ जिला कारागृह में मोबाइल मिलने और बंदियों के वीडियो वायरल होने का यह कोई पहला मामला नहीं है। अतीत में भी ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जो जेल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती हैं। प्रतिबंधित वस्तुओं का जेल के भीतर पहुंचना और उनका लंबे समय तक इस्तेमाल होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है।
वर्तमान में पुलिस और जेल प्रशासन दोनों ही इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने में जुटे हैं। जांच का मुख्य केंद्र यह है कि जेल के भीतर मोबाइल पहुंचाने वाला गिरोह कौन सा है और क्या इसमें जेल के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की भी संलिप्तता है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान जो भी नाम सामने आएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
