बिजनौर: किशोरी से दुष्कर्म के दोषी को 10 साल की कैद, कोर्ट ने लगाया भारी जुर्माना
Bijnor POCSO court convicts accused in minor rape case, imposes fine. विशेष सत्र न्यायाधीश कल्पना पांडे ने अंकित को 10 वर्ष के कठोर कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अभियोजन अधिकारी भालेंद्र राठौर ने बताया कि यह घटना करीब तीन साल पहले की है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

चांदपुर थाना क्षेत्र का मामला
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में पॉक्सो कोर्ट ने एक गंभीर मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है। चांदपुर थाना क्षेत्र में करीब तीन साल पहले एक नाबालिग किशोरी के साथ हुई दुष्कर्म की घटना में अदालत ने आरोपी अंकित को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने उस पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
विशेष सत्र न्यायाधीश कल्पना पांडे की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना। अभियोजन अधिकारी भालेंद्र राठौर ने जानकारी दी कि यह मामला कानून की सख्त धाराओं के तहत दर्ज किया गया था।
क्या थी पूरी घटना
घटना 25 जून 2023 की रात की है। पीड़ित किशोरी की उम्र उस समय 14 वर्ष थी। शिकायतकर्ता महिला के अनुसार, उनकी भतीजी रात करीब 10 बजे घर के पास स्थित नल पर पानी लेने गई थी। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला अंकित वहां पहुंचा और किशोरी को बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया, जहां उसने उसके साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया।
पीड़िता की तलाश में जब शिकायतकर्ता की पुत्री मौके पर पहुंची, तो उसने आरोपी की करतूत देख ली और शोर मचा दिया। शोर सुनकर आसपास के लोग एकत्रित होने लगे, जिसे देखकर आरोपी अंकित मौके से फरार हो गया। इस घटना के बाद पीड़िता के परिजनों ने तुरंत पुलिस को सूचित किया और मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई।
पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया
पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए त्वरित कार्रवाई की। पीड़िता के बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराए गए, जिसमें उसने पूरी घटना का विस्तृत विवरण दिया। इन बयानों और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी अंकित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस ने मामले में मजबूत चार्जशीट तैयार कर अदालत में पेश की।
सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सभी सबूतों और गवाहों के बयानों का बारीकी से विश्लेषण किया। अदालत ने पाया कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह से सिद्ध होते हैं। इसके बाद न्यायाधीश ने अंकित को दोषी ठहराते हुए उसे 10 साल की कठोर सजा और जुर्माने का दंड सुनाया।
न्याय व्यवस्था का कड़ा रुख
इस फैसले ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि नाबालिगों के खिलाफ होने वाले अपराधों में अदालतें बेहद सख्त रुख अपना रही हैं। पॉक्सो अधिनियम के तहत इस तरह के मामलों में त्वरित सुनवाई और सजा सुनिश्चित की जा रही है ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए। स्थानीय लोगों ने अदालत के इस फैसले का स्वागत किया है।
जुर्माने की राशि जमा न करने पर आरोपी को अतिरिक्त सजा का प्रावधान भी हो सकता है। यह मामला बिजनौर क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और पीड़ित परिवार को इस फैसले से न्याय मिलने की उम्मीद पूरी हुई है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
