भोपाल में सार्वजनिक परिवहन का विस्तार: 10 नई ई-बसों से सुगम होगा सफर
राजधानी भोपाल के पब्लिक ट्रांसपोर्ट के रूप में शामिल ई-बसों की मंगलवार से संख्या बढ़ जाएगी। 10 इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर और उतरेंगी।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

राजधानी की सड़कों पर अब दौड़ेंगी 20 इलेक्ट्रिक बसें
भोपाल में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मंगलवार से शहर की सड़कों पर 10 और नई इलेक्ट्रिक बसें उतारी जा रही हैं, जिससे शहर में ई-बसों की कुल संख्या बढ़कर 20 हो गई है। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) द्वारा संचालित इन बसों के बढ़ने से यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी और सुगम यात्रा का लाभ मिलेगा।
इन बसों का मुख्य केंद्र एमपी नगर क्षेत्र होगा, जहाँ से ये बसें शहर के विभिन्न प्रमुख इलाकों को जोड़ेंगी। इस विस्तार का सीधा असर बैरागढ़, कोलार रोड और बावड़ियाकलां जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों पर पड़ेगा, जहाँ यात्रियों को अब पहले की तुलना में अधिक बसें उपलब्ध होंगी। प्रशासन का मानना है कि इससे न केवल यात्रा का समय बचेगा, बल्कि सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर रहने वाले हजारों लोगों को राहत मिलेगी।
यात्री क्षमता में होगा इजाफा
आंकड़ों के अनुसार, अब तक चल रही 10 ई-बसों में प्रतिदिन औसतन 4,500 यात्री सफर कर रहे थे, जिनमें कामकाजी महिलाओं और छात्र-छात्राओं की संख्या काफी अधिक है। बसों की संख्या दोगुनी होने से अब प्रतिदिन 10 से 12 हजार यात्रियों को सेवा मिल सकेगी। इन बसों का किराया न्यूनतम 6-7 रुपये से लेकर अधिकतम 40 रुपये तक निर्धारित किया गया है, जो आम जनता के लिए काफी किफायती है।
ई-बसें मुख्य रूप से तीन प्रमुख रूटों पर संचालित की जा रही हैं। इनमें चिरायु अस्पताल (बैरागढ़) से आकृति ईको सिटी (सलैया), कोच फैक्ट्री से कोलार रोड और बैरागढ़ डिपो से आईएसबीटी तक के रूट शामिल हैं। इन रूटों के माध्यम से शहर के प्रमुख बाजार, अस्पताल और मेट्रो स्टेशन आपस में जुड़ गए हैं, जिससे यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने में आसानी होगी।
अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हैं नई बसें
इन इलेक्ट्रिक बसों की सबसे बड़ी विशेषता दिव्यांगजनों के लिए दी गई सुविधा है। बसों में हाइड्रोलिक डोर लगाए गए हैं, जिनकी मदद से व्हीलचेयर और ट्रायसिकल का उपयोग करने वाले यात्री आसानी से बस में चढ़ और उतर सकते हैं। इसके अलावा, बस के भीतर व्हीलचेयर के लिए पर्याप्त स्थान भी आरक्षित किया गया है। सुरक्षा की दृष्टि से हर बस में 6 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी निगरानी सीधे डिपो स्थित कंट्रोल रूम से की जाती है।
आकार के मामले में भी ये बसें शहर की पुरानी सिटी बसों से अलग हैं। इनकी लंबाई 9 मीटर और चौड़ाई साढ़े 3 मीटर है, जो इन्हें तंग सड़कों और भारी ट्रैफिक वाले इलाकों में चलने के लिए अधिक उपयुक्त बनाती है। 12 मीटर लंबी पारंपरिक बसों की तुलना में ये ई-बसें ट्रैफिक जाम में कम फंसती हैं, जिससे यात्रा का समय भी कम लगता है।
भविष्य की राह
भोपाल में ई-बसों के संचालन से न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि सार्वजनिक परिवहन का एक मजबूत ढांचा भी तैयार होगा। बीसीएलएल का लक्ष्य है कि आने वाले समय में इन सेवाओं का और अधिक विस्तार किया जाए ताकि शहर के हर कोने तक पर्यावरण के अनुकूल परिवहन सुविधा पहुंच सके। यात्रियों के लिए यह एक बेहतर विकल्प बनकर उभरा है, जिससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!