भिवानी में 30 जुलाई को बड़ा आंदोलन: टावर प्रभावित किसानों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ फूंका बिगुल
Bhiwani farmers protest HVPNL tower installation injustice. भिवानी के कितलाना टोल प्लाजा पर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की बैठक आयोजित की गई। जिसकी अध्यक्षता भाकियू (टिकैत) जिलाध्यक्ष राकेश आर्य नीमड़ीवाली ने की।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

हरियाणा के भिवानी जिले में बिजली लाइनों के लिए टावर लगाने की प्रक्रिया के विरोध में किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। कितलाना टोल प्लाजा पर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें भिवानी और चरखी दादरी जिले के उन किसानों ने हिस्सा लिया जो एचवीपीएनएल (HVPNL) द्वारा बिछाई जा रही बिजली लाइनों से सीधे प्रभावित हैं। बैठक की अध्यक्षता भाकियू (टिकैत) के जिलाध्यक्ष राकेश आर्य नीमड़ीवाली ने की।
अधिकारियों के रवैये पर किसानों में गहरा आक्रोश
बैठक के दौरान किसानों ने आरोप लगाया कि एचवीपीएनएल द्वारा भिवानी, ईश्वरवाल और आदमपुर जैसे क्षेत्रों में बिछाई जा रही बिजली लाइनों के मामले में प्रशासन का रवैया पूरी तरह से तानाशाहीपूर्ण है। किसानों का कहना है कि उनकी जमीनों का अधिग्रहण करते समय न तो उचित मुआवजे का ध्यान रखा जा रहा है और न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है। अधिकारियों द्वारा किसानों की आपत्तियों को नजरअंदाज करने से प्रभावित परिवारों में भारी रोष व्याप्त है।
भाकियू जिलाध्यक्ष राकेश आर्य ने स्पष्ट किया कि टावर लगाने के नाम पर किसानों की उपजाऊ भूमि को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की मनमानी के कारण किसान अपनी ही जमीन पर बेबस महसूस कर रहे हैं। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप धारण करेगा।
सरकार पर लगाया अघोषित इमरजेंसी का आरोप
राकेश आर्य ने वर्तमान सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि राज्य में अघोषित इमरजेंसी जैसे हालात पैदा कर दिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले किसानों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। आर्य ने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन सरकार इसे कुचलने की कोशिश कर रही है, जिसे भाकियू किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।
यूनियन के अनुसार, यह लड़ाई केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों के अधिकारों और संविधान की रक्षा के लिए लड़ी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई का समय आ गया है।
30 जुलाई को होगा प्रदेश स्तरीय रोष प्रदर्शन
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी 30 जुलाई को भिवानी में एक बड़ा प्रदेश स्तरीय रोष प्रदर्शन किया जाएगा। इस प्रदर्शन के माध्यम से किसान सरकार को अपनी ताकत का अहसास कराएंगे और अपनी मांगों को मजबूती से रखेंगे। भाकियू ने सभी प्रभावित किसानों से इस प्रदर्शन में भारी संख्या में पहुंचने का आह्वान किया है।
इस आंदोलन की सफलता के लिए भाकियू ने रणनीति तैयार कर ली है। आने वाले दिनों में गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक किया जाएगा और उन्हें 30 जुलाई के प्रदर्शन के लिए एकजुट किया जाएगा। किसानों का मानना है कि यह प्रदर्शन सरकार की तानाशाही के खिलाफ एक मील का पत्थर साबित होगा।
फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन किसानों की बढ़ती लामबंदी ने स्थानीय अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। अब सबकी निगाहें 30 जुलाई को होने वाले प्रदर्शन पर टिकी हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
