भावनगर जहरीली शराब कांड: मृतकों की संख्या 11 हुई, मुख्य आरोपी रईस भोपाल से गिरफ्तार
गुजरात के भावनगर में जहरीली शराब से 9 लोगों की मौत के मामले में मुख्य आरोपी रईस को गुजरात पुलिस ने उज्जैन से गिरफ्तार किया है। जांच में मुरैना निवासी नरेंद्र यादव उर्फ ‘डॉक्टर’ की भूमिका सामने आई है, जिस पर अवैध शराब बनाने में विशेषज्ञ होने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक नरेंद्र ने रईस और शराब तस्कर गौतम सोलंकी के साथ मिलकर जहरीली शराब तैयार की थी, जिसे पीने से लोगों की मौत हुई और खुद नरेंद्र की भी जान चली गई। FSL जांच में शराब में 38.59% जहरीला मिथाइल अल्कोहल (मेथनॉल) पाया गया। मामले के तार मुरैना और उज्जैन से जुड़ने के बाद जांच और गंभीर हो गई है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

गुजरात के भावनगर में जहरीली शराब से हाहाकार, मरने वालों का आंकड़ा बढ़ा
गुजरात के भावनगर जिले में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस त्रासदी में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 11 तक पहुंच गई है। गुरुवार को दो और लोगों की मौत की सूचना मिली, हालांकि स्थानीय प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर इनमें से एक की पुष्टि की है। वर्तमान में चार नए मरीज अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं, जबकि 20 से अधिक लोगों का इलाज अभी भी जारी है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए गुजरात पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी रईस को मध्य प्रदेश से गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया है कि रईस की ससुराल भोपाल के करोंद इलाके में स्थित है। पुलिस के अनुसार, रईस पिछले डेढ़ महीने से गुजरात के विभिन्न हिस्सों में छिपकर घटिया गुणवत्ता की शराब बनाने का काम कर रहा था। अब पुलिस उससे शराब की पूरी सप्लाई चेन और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में पूछताछ कर रही है।
पुलिस प्रशासन पर गिरी गाज, फॉरेंसिक रिपोर्ट में मेथनॉल की पुष्टि
इस कांड के बाद पुलिस महकमे में भी हड़कंप मचा हुआ है। स्टेट मॉनिटरिंग सेल (एसएमएस) के एसपी मयूरसिंह चावड़ा ने बताया कि लापरवाही बरतने के आरोप में अब तक कुल 6 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है। इसमें वरतेज पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर एबी पढेरिया और लोकल क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर मयूरध्वजसिंह सरवैया शामिल हैं। एफएसएल की जांच रिपोर्ट ने मामले की भयावहता को उजागर कर दिया है, जिसमें जब्त की गई 'रॉयल स्टैग' की बोतलों में 38.59% मेथनॉल पाया गया है, जबकि एथेनॉल की मात्रा मात्र 0.94% थी। मेथनॉल की यह उच्च मात्रा सीधे तौर पर जानलेवा साबित हुई है।
जांच में यह भी पता चला है कि आरोपियों ने नकली शराब के तीन अलग-अलग बैच तैयार किए थे। पहले बैच की करीब 51 पेटियां बाजार में खपा दी गई थीं। दूसरा बैच खराब होने के कारण नष्ट कर दिया गया, लेकिन तीसरा बैच जो 25 पेटियों का था, वही सबसे घातक साबित हुआ। इसी खेप के सेवन से लोगों की जान गई है।
मुरैना कनेक्शन और 'डॉक्टर' की भूमिका
इस पूरे मामले में मुरैना के नरेंद्र यादव उर्फ 'डॉक्टर' का नाम सामने आने से जांच का दायरा मध्य प्रदेश तक फैल गया है। नरेंद्र को नकली शराब बनाने में महारत हासिल थी, जिसके कारण उसे 'डॉक्टर' कहा जाता था। रईस ने उसे विशेष रूप से गुजरात बुलाया था। जांच में यह भी सामने आया है कि नरेंद्र ने खुद भी वही जहरीली शराब पी थी, जिसके सेवन से उसकी भी मौत हो गई। वह मुरैना के डोंगरपुर किरार गांव का निवासी था।
नरेंद्र के परिजनों का दावा है कि वह एक सामान्य मजदूर था और 15 अगस्त को ही पहली बार गुजरात गया था। उसकी मौत के बाद परिजन बिना किसी कानूनी सूचना के शव को मुरैना ले आए थे। हालांकि, बाद में भारी विरोध और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मुरैना में ही शव का पोस्टमार्टम कराया गया। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह केवल एक स्थानीय घटना थी या फिर मध्य प्रदेश से गुजरात तक फैला कोई बड़ा संगठित शराब माफिया नेटवर्क है।
आगे की कार्रवाई
अब तक इस मामले में कुल 21 आरोपियों की पहचान की गई है, जिनमें से 13 को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब मुख्य आरोपी रईस और अन्य गिरफ्तार लोगों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क के बाकी सदस्यों की तलाश कर रही है। प्रशासन ने क्षेत्र में अवैध शराब के अड्डों पर छापेमारी तेज कर दी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!