बेगूसराय में जेल भरो आंदोलन: लेबर कोड के विरोध में उतरे 100 कार्यकर्ता हिरासत में
बेगूसराय में सोमवार को सीटू (CITU), बिहार प्रांतीय खेतिहर मजदूर यूनियन और बिहार राज्य किसान सभा के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर जेल भरो अभियान किया गया। इस दौरान करीब 100 कार्यकर्ता ट्रैफिक चौक के पास से पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह और जिला पार्षद अंजनी कुमार सिंह के नेतृत्व में निकले और समाहरणालय के उत्तरी द्वार पर पहुंचे।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

बेगूसराय में सोमवार को सीटू (CITU), बिहार प्रांतीय खेतिहर मजदूर यूनियन और बिहार राज्य किसान सभा के संयुक्त राष्ट्रव्यापी आह्वान पर 'जेल भरो अभियान' का आयोजन किया गया। इस विरोध प्रदर्शन में शामिल करीब 100 कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर जिला समाहरणालय की ओर कूच किया। प्रदर्शन का नेतृत्व पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह और जिला पार्षद अंजनी कुमार सिंह ने किया।
प्रदर्शनकारी ट्रैफिक चौक से नारेबाजी करते हुए समाहरणालय के उत्तरी द्वार तक पहुंचे। वहां पहले से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और प्रशासन ने मुख्य द्वार को बंद कर दिया था। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच कार्यकर्ताओं ने सरकार विरोधी नारे लगाए। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल सभी 100 कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया और उन्हें नगर थाना ले गई, जहां आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
संविधान और जनवादी अधिकारों पर हमले का आरोप
आंदोलन को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार संविधान और जनवादी अधिकारों को समाप्त करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार द्वारा लाए गए कानून अंग्रेजों के 'रॉलेट एक्ट' की याद दिलाते हैं, जिनका उद्देश्य हड़ताल और विरोध के अधिकारों को कुचलना है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे इन मुद्दों को लेकर मजदूर और किसान लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि देश में रोजगार देने के बजाय नौकरियां छीनी जा रही हैं। रेलवे और हवाई अड्डों के निजीकरण पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को भी कॉरपोरेट घरानों और विदेशी हाथों में सौंपा जा रहा है। उन्होंने बिहार में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज खोलने के सरकारी फैसले पर भी सवाल उठाए।
प्रमुख मांगें और भविष्य की रणनीति
जिला पार्षद अंजनी कुमार सिंह ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को खेती-किसानी के लिए घातक बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लागू किए गए चार लेबर कोड श्रम कानूनों की हत्या के समान हैं, जिन्हें तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने न्यूनतम मजदूरी को बढ़ाकर 700 रुपये करने की पुरजोर वकालत की।
प्रदर्शनकारियों ने ओल्ड पेंशन स्कीम की बहाली और कृषि कानूनों के खिलाफ जारी हमलों को बंद करने की मांग की। उन्होंने मनरेगा कानून में किए गए बदलावों को ग्रामीण मजदूरों के लिए नुकसानदेह बताते हुए पुराने स्वरूप में मनरेगा की वापसी की मांग दोहराई। इसके साथ ही, जिले में बिगड़ती कानून व्यवस्था और बढ़ते अपराध पर भी चिंता व्यक्त की गई।
इस प्रदर्शन के माध्यम से मजदूर और किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका संघर्ष जारी रहेगा। प्रशासन द्वारा हिरासत में लिए जाने के बावजूद कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा रहा और उन्होंने अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने का संकल्प लिया।
बेगूसराय में हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर केंद्र सरकार की श्रम और कृषि नीतियों के खिलाफ देशभर में पनप रहे असंतोष को रेखांकित किया है। आने वाले दिनों में इन संगठनों द्वारा और भी बड़े स्तर पर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा सकती है, जिससे प्रशासन की चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!